वीर्य स्खलन के बाद लिंग दोबारा खड़ा क्यों नहीं होता?

आमतौर पर स्खलन के बाद व्यक्ति में रिकवरी पीरियड शुरू होता है, जिस दौरान उसको अपना लिंग फिर से खड़ा करना शारीरिक रूप से असंभव होता है। इस पीरियड को मेडिकल भाषा में “दुर्दम्य अवधि” या “रिफ्रैक्टरी पीरियड” भी कहा जाता है।

क्या यह सभी में होता है?

हाँ! यह सभी में होता है, यहाँ तक कि महिलाओं में भी। सभी व्यक्तियों में यौन प्रतिक्रिया का चक्र चार चरणों में होता है, जिसके आखिरी चरण में रिफ्रैक्टरी पीरियड शुरू होता है।

यौन प्रतिक्रिया के चार चरण निम्न हैं:

  1. उत्तेजना: इस पहले चरण में आपके दिल की धड़कन तेज हो जाती है, सांस तेज हो जाती है, और आपकी मांसपेशियों में तनाव और खिंचाव होने लगता है। आपके जननांगों की ओर तेजी से रक्त बढ़ने लगता है।
  2. पठार: इस दौरान आपकी मांसपेशियों में खिंचाव होता रहता है। यदि आप पुरुष हैं, तो आपके अंडकोष आपके शरीर के ऊपर की ओर खिंचने लगेंगे। यदि आप महिला हैं तो आपकी क्लाइटोरिस अत्यधिक संवेदनशील हो जाएगी और क्लाइटोरल हुड के पीछे खिसक जाएगी।
  3. ऑर्गाज्म: आपकी मांसपेशियां सिकुड़ती लगेंगीं व उनमें तनाव कम होने लगेगा, और आपका शरीर उत्साह और कम्पन्न का अनुभव करता करेगा। यदि आप एक पुरुष हैं, तो आपकी पैल्विक मांसपेशियां सिकुड़कर वीर्य को स्खलित करने में मदद करेंगी।
  4. रिकवरी: वीर्य स्खलन के बाद आपकी मांसपेशियां शिथिल होने लगेंगी, आपका ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन कम होने लगेगी, और आपका शरीर यौन उत्तेजना के प्रति कम प्रतिक्रियाशील हो जायेगा। यहीं से रिफ्रैक्टरी पीरियड शुरू होता है।

क्या यह पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग अवधि का होता है?

हाँ, पुरुषों में रिफ्रैक्टरी पीरियड लम्बा और अलग-अलग अवधि का हो सकता है, जबकि महिलाओं में यह छोटा होता है।

2013 के एक रिव्यु के अनुसार पुरुषों में ऑर्गाज्म के बाद शरीर में होने वाले परिवर्तनों में उनका पेरीफेरल नर्वस सिस्टम (PNS) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि उनका रिफ्रैक्टरी पीरियड लम्बा होता है।

ऐसा माना जाता है कि प्रोस्टाग्लैंडिन (prostaglandins) नामक कंपाउंड पुरुषों की समग्र तंत्रिका प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप लम्बा रिफ्रैक्टरी पीरियड होता है।

सोमैटोस्टैटिन (somatostatin) नामक पेप्टाइड भी स्खलन के ठीक बाद यौन उत्तेजना को कम करने के लिए जिम्मेदार होता है।

इससे समझा जा सकता है कि आमतौर पर पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले लम्बा रिफ्रैक्टरी पीरियड क्यों होता है।

 
 
 
 

लिंग और आयु के अनुसार औसत रिफ्रैक्टरी पीरियड कितना होता है?

रिफ्रैक्टरी पीरियड की कोई सटीक अवधि बता पाना काफी मुश्किल है। क्योंकि यह व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य, कामेच्छा, आहार आदि विभिन्न कारकों के आधार पर एक दूसरे से व्यापक रूप से भिन्न हो सकता है।

औसत आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं में ऑर्गाज्म के बाद सिर्फ कुछ सेकंड्स के बाद दोवारा उत्तेजना होना संभव है। यही कारण है कि महिलायें एक ही बार में कई बार स्खलित हो सकती हैं, या उनके लिए एक बार में एक से अधिक पुरुषों के साथ सेक्स करना संभव होता है।

पुरुषों के लिए, रिफ्रैक्टरी पीरियड बहुत अधिक भिन्न होता है। इसमें कुछ मिनट, एक घंटा, कई घंटे, एक दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है।

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपके शरीर को फिर से उत्तेजित होने में 12 से 24 घंटे लग सकते हैं।

2005 के एक विश्लेषण से पता चलता है कि 40 वर्ष की आयु के बाद महिला और पुरुष दोनों के रिफ्रैक्टरी पीरियड में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होती है।

क्या यह अवधि हस्तमैथुन और सेक्स में अलग-अलग होती है?

हाँ, थोड़ी बहुत।

एक 2006 के रिव्यु में पुरुषों और महिलाओं के हस्तमैथुन या लिंग-योनि संभोग के तीन अलग-अलग शोधों के आंकड़ों को देखा गया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रोलैक्टिन हॉर्मोन, जो रिफ्रैक्टरी पीरियड में प्रमुख भूमिका निभाता है, हस्तमैथुन के बाद की तुलना में योनि-लिंग सेक्स के बाद का स्तर 400 प्रतिशत ज्यादा पाया गया।

इससे यह पता चलता है कि रिफ्रैक्टरी पीरियड अकेले हस्तमैथुन करने के बाद की तुलना में साथी के साथ संभोग करने के बाद अधिक समय तक चल सकता है।

क्या मैं इसकी अवधि कम करने के लिए कुछ कर सकता हूं?

हाँ आप कर सकते हैं। रिफ्रैक्टरी पीरियड की अवधि को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख कारक होते हैं, जिन्हें आप नियंत्रित करके अपने रिफ्रैक्टरी पीरियड को बढ़ा सकते हैं। यह कारक हैं: उत्तेजना, यौन क्रिया और समग्र स्वास्थ्य।

उत्तेजना बढ़ाने के लिए निम्न कार्य किये जा सकते हैं:

  • हस्तमैथुन को संभोग के हिस्से के रूप में शामिल करें। यदि आपका रिफ्रैक्टरी पीरियड लम्बा है, तो सेक्स से पहले हस्तमैथुन करके देखें। यदि इससे आपको लाभ मिलता है, तो नियमित रूप से इसे करें।
  • अपने सेक्स के टाइम टेबल को बदलकर देखें। यदि आप हर दूसरे दिन सेक्स करते हैं, तो हफ्ते में एक बार करके देखें। यदि आप पहले से ही हफ्ते में एक बार सेक्स करते हैं, तो इसे दो हफ़्तों में एक बार करके देखें कि क्या होता है। अपने सेक्स के टाइम टेबल को बदलने से रिफ्रैक्टरी पीरियड में भी बदलाव आ सकता है।
  • नई सेक्स पोजीशन अपनाकर देखें। अलग-अलग सेक्स पोजीशन का मतलब है अलग-अलग कामोत्तेजना। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि आप अपनी पार्टनर के ऊपर हों या वह आपके ऊपर हो तो आपको अलग उत्तेजना का अनुभव हो, जिससे रिफ्रैक्टरी पीरियड भी अलग हो सकता है। कुछ सेक्स पोजीशन जिनको आप अपनाकर देख सकते हैं, वह निम्न हैं
  • कमोत्तेजक क्षेत्रों पर प्रयोग करके देखें। क्या आपको अपनी साथी के कान, गर्दन, निपल्स, होंठ और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को छूने, खींचने, मोड़ने या किश करने से अतिरिक्त उत्तेजना का अनुभव होता है। तो एक-दूसरे के विभिन्न संवेदनशील अंगों पर प्रयोग करके देखें।
  • फेंटसी या रोल प्ले करें। हर व्यक्ति की अपनी सेक्सुअल फेंटसी होती हैं, जिनके बारे में सोचने पर ही उनकी उत्तेजना बढ़ जाती है। इन फेंटसी को अपनी पार्टनर के साथ साझा करें, और अपने सेक्स में इन्हें रोल-प्ले के रूप में शामिल करें।

यौन क्रिया बढ़ाने के लिए निम्न कार्य किये जा सकते हैं:

  • केगेल एक्सरसाइज का अभ्यास करें: लिंग के पीछे पेल्विक फ्लोर नामक मांसपेशियाँ होती हैं, जो उत्तेजना के दौरान लिंग में रक्त और वीर्य को रोके रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनको मजबूत बनाने की एक्सरसाइज को केगेल एक्सरसाइज कहा जाता है। इन मांसपेशियों को मजबूत बनाकर आप अपने वीर्य स्खलन को नियंत्रित कर सकते हैं और लम्बे समय तक सेक्स कर सकते हैं।
  • सेक्स से पहले शराब न पियें: यह एक गलत धारणा है कि शराब आपके सेक्स के आनंद को बढ़ा सकती है, बल्कि इसके विपरीत शराब आपकी कामोत्तेजना के लिए आवश्यक हृदय संबंधी कार्यों में हस्तक्षेप कर सकती है।
  • यदि आपको इरेक्टाइल डिसफंक्शन है, तो इसकी दवाओं के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें: लिंग को खड़ा न कर पाने या देर तक खड़ा बनाये न रख पाने की समस्या को इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहा जाता है। सिल्डेनाफिल (वियाग्रा) जैसी दवाएं लिंग की मांसपेशियों को आराम देकर और रक्त प्रवाह में सुधार करके आपके लिंग को पूरा खड़ा करने और कठोर बनाने में मदद कर सकती हैं। हालाँकि इन दवाओं के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं और कुछ व्यक्तियों में शायद यह ज्यादा प्रभावी न हों, इसलिए इनको लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए निम्न कार्य किये जा सकते हैं:

  • एक्टिव रहें: रोज कम से कम 20 से 30 मिनट की एक्सरसाइज करने से आपका ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रण में रहेगा।
  • स्वस्थ आहार का सेवन करें: अपने आहार को ऐसे खाद्य पदार्थों से भरें जो रक्त के प्रवाह को बढ़ाते हैं, जैसे सैल्मन, रसदार फल, हरी सब्जियाँ और नट्स। तले भुने और अत्यधिक तेल युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें।

निष्कर्ष

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हर किसी का रिफ्रैक्टरी पीरियड अलग-अलग होता है। आप यह भी देख सकते हैं कि रिफ्रैक्टरी पीरियड हर एक स्खलन के बाद अलग-अलग हो सकता है।

रिफ्रैक्टरी पीरियड कई अद्वितीय कारकों के आधार पर प्रभावित होता है। इनमें से कुछ को आप बदल सकते हैं, जैसे शराब का सेवन और सम्पूर्ण खानपान। और कुछ कारक जैसे पुरानी स्वास्थ्य स्थितियाँ और उम्र को आप नहीं बदल सकते।

यदि आप इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आपका ऑर्गाज्म ठीक से नहीं होता या आपका रिफ्रैक्टरी पीरियड काफी ज्यादा है, तो एक सेक्स चिकित्सक से मिलें।

वह आपके किसी भी प्रश्न का सही उत्तर दे सकता है और यदि आवश्यक हो तो आपमें किसी अंतर्निहित स्थिति की पहचान और उपचार करने में मदद कर सकता है।

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