मुँह में यौन संचारित रोग होने के कारण, लक्षण, प्रकार और इलाज

यौन संचारित संक्रमण और रोग (एसटीआई) सिर्फ योनि या गुदा सेक्स के माध्यम से नहीं होते हैं, बल्कि जननांगों के साथ स्किन का कोई भी संपर्क आपके साथी में यौन संचारित संक्रमण पारित करने के लिए पर्याप्त है।

इसका मतलब यह है कि मुंह, होंठ या जीभ का उपयोग करके मुख सेक्स करने से भी अन्य यौन गतिविधियों के समान ही यौन संचारित संक्रमण फैलने का जोखिम होता है।

संक्रमण के जोखिम को कम करने का एकमात्र तरीका प्रत्येक सेक्स के दौरान कंडोम या अन्य बाधा विधि का उपयोग करना है।

मौखिक (ओरल) सेक्स के दौरान कौन-कौन से यौन संचारित संक्रमण फैल सकते हैं, आपको किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और कैसे जांच करानी चाहिए, इसके बारे विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ते रहें।

क्लैमाइडिया

क्लैमाइडिया एक क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia trachomatis) नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण है। यह बैक्टीरिया के कारण होने वाला सबसे आम यौन संचारित संक्रमण है।

क्लैमाइडिया मुख सेक्स के माध्यम से फैल सकता है, लेकिन इसके गुदा या योनि सेक्स के माध्यम से फैलने की सम्भावना अधिक होती है।

गले को प्रभावित करने वाले अधिकतर क्लैमाइडिया के कोई लक्षण नहीं होते हैं। जब लक्षण होते हैं, तो व्यक्ति को गले में खराश हो सकती है।

क्लैमाइडिया कोई आजीवन बनी रहने वाली या गंभीर स्थिति नहीं है, और सही एंटीबायोटिक दवाओं के जरिये इसको ठीक किया जा सकता है।

गोनोरिया

गोनोरिया एक सामान्य एसटीआई है, जो निसेरिया गोनोरिया (Neisseria gonorrhoeae) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।

गोनोरिया और क्लैमाइडिया दोनों को तकनीकी रूप से मुख सेक्स के माध्यम से पारित किया जा सकता है, लेकिन इसके सटीक जोखिम को निर्धारित करना चुनौतीपूर्ण है। क्योंकि अक्सर मुख सेक्स करने वाले लोग योनि या गुदा सेक्स भी करते हैं, इसलिए उनमें सही संचारक का पता लगाना मुश्किल होता है।

गोनोरिया गले, जननांगों, मूत्रमार्ग और मलाशय को प्रभावित कर सकता है।

क्लैमाइडिया की तरह ही, अक्सर गले के गोनोरिया के कोई लक्षण नहीं होते। जब लक्षण होते हैं, तो यह आमतौर पर संचरण के एक हफ्ते बाद होते है और इनमें गले में खराश होना शामिल हो सकता है।

गोनोरिया को सही एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, दुनिया भर में दवा प्रतिरोधी गोनोरिया (जिसपर दवाओं का असर नहीं होता) की रिपोर्टों में वृद्धि हुई है।

इसलिए यदि आपके द्वारा एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स पूरा करने के बाद भी लक्षण दूर नहीं होते हैं, तो आपको पुन: टेस्ट करवाने और गोनोरिया के सही प्रकार का पता लगाने की आवश्यकता होगी।

सिफलिस

सिफलिस एक ट्रेपोनिमा पैलिडम (Treponema pallidum) नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला यौन संचारित संक्रमण है। इसके होने की सम्भावना काफी कम होती है और यह अन्य यौन संचारित रोगों की तरह सामान्य नहीं होता।

सिफलिस मुंह, होंठ, जननांग, गुदा और मलाशय को प्रभावित कर सकता है। इलाज न कराने पर, सिफलिस शरीर के अन्य भागों में फैलकर उनको भी प्रभावित कर सकता है, जिनमें रक्त वाहिकाएं और तंत्रिका तंत्र भी शामिल है।

सिफलिस के लक्षण चरणों में होते हैं। पहले चरण (प्राथमिक सिफलिस) में जननांगों, मलाशय, या मुंह में एक दर्द रहित घाव होता है। दर्द न होने के कारण इस घाव पर ध्यान जाना मुश्किल होता है, और यह अक्सर बिना इलाज के अपनेआप गायब हो जाता है।

दूसरे चरण (माध्यमिक सिफलिस) में, आपको स्किन पर लाल चकत्ते, लसिका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) में सूजन और बुखार का अनुभव हो सकता है।

सिफलिस का तीसरा चरण (गुप्त सिफलिस) काफी लम्बे समय तक बिना कोई लक्षण दिखाए बना रह सकता है।

आखिरी चरण (तृतीयक सिफलिस) आपके दिमाग, नसों, आंखों, हृदय, रक्त वाहिकाओं, लिवर, हड्डियों और जोड़ों को प्रभावित कर सकता है।

यह गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में भी फैल सकता है और मृतजन्म या अन्य गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।

सिफलिस को सही एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक किया जा सकता है।

यदि इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो यह स्थिति काफी लम्बे समय तक शरीर में बनी रह सकती है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे अंग क्षति और महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल नुकसान पैदा कर सकती है।

 
 
 
 

एचएसवी-1 दाद

हरपीज सिंप्लेक्स वायरस टाइप 1 (एचएसवी-1) मौखिक और जननांग दाद का कारण बनने वाले दो सामान्य वायरल संक्रमणों में से एक है।

एचएसवी-1 मुख्य रूप से मुख-से-मुख या मुख-से-जननांग संपर्क के माध्यम से फैलता है, जिससे मौखिक दाद और जननांग दाद दोनों होते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एचएसवी-1 दुनिया भर में 50 वर्ष से कम आयु के अनुमानित 370 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है।

एचएसवी-1 होंठ, मुंह, गला, जननांग, मलाशय और गुदा को प्रभावित कर सकता है। मौखिक दाद के लक्षणों में मुंह, होंठ और गले पर छाले या घाव (जिसे ठंडे घाव भी कहा जाता है) शामिल हैं।

यह जुकाम की तरह ही आजीवन बनी रहने वाली स्थिति है, जो लक्षण मौजूद न होने पर भी फैल सकती है। उपचार दाद के प्रकोप को कम करने या रोकने में और उनकी आवृत्ति को कम करने में मदद कर सकता है।

एचएसवी-2 दाद

एचएसवी-2 मुख्य रूप से संभोग के माध्यम से फैलता है, जिससे जननांगों या गुदा में दाद होती है।

WHO के अनुसार, एचएसवी-2 दुनिया भर में 15 से 49 वर्ष की आयु के अनुमानित 49 करोड़ 10 लाख लोगों को प्रभावित करता है।

एचएसवी-2 मौखिक सेक्स के माध्यम से भी फैल सकता है और एचएसवी-1 के साथ होने पर कुछ लोगों में हरपीज एसोफैगिटिस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, लेकिन यह काफी दुर्लभ है। हरपीज एसोफैगिटिस के लक्षण निम्न हैं:

  • मुंह में खुले घाव होना
  • निगलने में कठिनाई या दर्द होना
  • ठंड लगना
  • बुखार
  • अस्वस्थता (सामान्य तौर पर अस्वस्थ महसूस करना)

यह एक आजीवन बनी रहने वाली स्थिति है जो लक्षण पैदा न होने पर भी फैल सकती है। उपचार दाद के प्रकोप को कम करने या रोकने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इस वायरस का कोई इलाज मौजूद नहीं है।

ह्यूमन पैपिलोमावाइरस (एचपीवी)

ह्यूमन पैपिलोमावाइरस (एचपीवी) संयुक्त राज्य अमेरिका में होने वाला सबसे आम यौन संचारित रोग है। अमेरिका के सीडीसी संस्थान का अनुमान है कि वर्तमान में लगभग 8 करोड़ अमेरिकी एचपीवी के साथ जी रहे हैं।

इस वायरस के फैलने की सम्भावना योनि या गुदा सेक्स और मुख सेक्स में समान होती है। एचपीवी मुंह, गले, जननांगों, गर्भाशय ग्रीवा, गुदा और मलाशय को प्रभावित करता है।

कुछ मामलों में, एचपीवी के कोई लक्षण नहीं दखते।

कुछ प्रकार के एचपीवी स्वरयंत्र या श्वसन में पैपिलोमाटोसिस होने का कारण बन सकते हैं, जो मुंह और गले को प्रभावित करता है। इसके लक्षण निम्न हैं:

  • गले के अंदर मस्से होना
  • स्वर में परिवर्तन आना
  • बोलने में कठिनाई होना
  • साँस फूलना

कुछ अन्य एचपीवी के प्रकार मुंह और गले को प्रभावित करते हैं और मस्सों का कारण नहीं बनते हैं, लेकिन यह सिर या गर्दन के कैंसर का कारण बन सकते हैं।

एचपीवी का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन अधिकांश एचपीवी बिना किसी समस्या के अपने आप ठीक हो जाते हैं। मुंह और गले के मस्सों को सर्जरी या अन्य उपचारों के माध्यम से हटाया जा सकता है, लेकिन ये दोबारा हो सकते हैं।

एचआईवी एड्स

एचआईवी एड्स आमतौर पर योनि और गुदा सेक्स से फैलता है। अमेरिका के सीडीसी संस्थान के अनुसार, मुख सेक्स के माध्यम से एचआईवी फैलने का जोखिम बेहद कम होता है, लेकिन यह संभव है।

एचआईवी एड्स एक आजीवन बनी रहने वाली बीमारी है, और कई लोगों को सालों तक इसके कोई लक्षण नहीं होते। एचआईवी से ग्रसित लोगों में शुरू में फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं।

एचआईवी का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इससे ग्रसित लोग एंटीवायरल दवाएं लेने से और उपचार कराते रहने से, लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

जाँच कैसे करवाएं

यौन संचारित रोग का पता लगाने के लिए, अमेरिका के सीडीसी संस्थान के अनुसार 25 साल से कम उम्र के सभी यौन रूप से सक्रिय पुरुषों और महिलाओं को क्लैमिडिया और गोनोरिया की वार्षिक जाँच करवानी चाहिए। गुदा सेक्स करने वाले लोगों को साल में कम से कम एक बार सिफलिस की भी जाँच करवानी चाहिए।

एक से अधिक लोगों के साथ यौन सम्बन्ध रखने वाले लोगों और गर्भवती महिलाओं को 25 साल की उम्र के बाद भी हर साल यौन संचारित रोगों की जाँच करवानी चाहिए।

13 से 64 वर्ष की आयु के सभी लोगों को अपने जीवन में कम से कम एक बार अपनी एचआईवी की जाँच जरूर करवानी चाहिए।

एचआईवी या किसी अन्य यौन संचारित रोग की जांच के लिए आप अपने डॉक्टर, यूरोलॉजिस्ट या स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जा सकते हैं।

अलग-अलग यौन संचारित रोग के लिए अलग-अलग जाँच की जाती है, जैसे:

  • क्लैमाइडिया और गोनोरिया की जाँच के लिए जननांगों, गुदा, गले या पेशाब का नमूना लिया जाता है।
  • एचआईवी की जाँच के लिए मुँह से नमूने या ब्लड टेस्ट की आवश्यकता होती है।
  • जननांग या मौखिक दाद में दाद का नमूना लिया जाता है।
  • सिफलिस में ब्लड टेस्ट या गले से नमूना लेने की आवश्यकता होती है।
  • एचपीवी (जिसमें मुंह या गले में मस्से होते हैं), में मस्सों को देखकर और लक्षणों के आधार पर जाँच की जाती है।

निष्कर्ष

हालाँकि यौन संचारित रोग आमतौर पर योनि या गुदा सेक्स के माध्यम से फैलते हैं, लेकिन यह मुख सेक्स के माध्यम से भी फैल सकते हैं।

सेक्स के दौरान कंडोम या अन्य बाधा विधि को सही ढंग से और हर बार इस्तेमाल करना, आपके जोखिम को कम करने और संचरण को रोकने का एकमात्र तरीका है।

यदि आप यौन रूप से सक्रिय हैं, खासतौर से एक से अधिक सेक्स पार्टनर के साथ, तो आपको नियमित रूप से यौन संचारित रोगों की जाँच करवाते रहना चाहिए।

आप इन रोगों का जितना जल्दी पता लगाएंगे, उतनी ही जल्दी इनका इलाज करवा पाएंगे और बाद में आने वाली गंभीर जटिलताओं से बच पाएंगे।

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