पुरुषों में यौन संचारित रोगों (एसटीडी) के आम लक्षण

अधिकतर पुरुष यह मान लेते हैं कि यदि उन्हें यौन संचारित रोग या संक्रमण ( एसटीडी या एसटीआई) है, तो उन्हें इसके लक्षण दिख जायेंगे।

हालाँकि अधिकांश एसटीडी और एसटीआई में लक्षण पैदा होते हैं, लेकिन यह काफी सामान्य हो सकते हैं और इन्हें आसानी से कोई अन्य आम स्थिति समझ लिया जाता है। साथ ही, कुछ मामलों में तो एसटीडी के बिल्कुल भी लक्षण नहीं होते।

इसलिए यौन रूप से सक्रिय प्रत्येक पुरुष को विभिन्न यौन संचारित रोगों के लक्षणों या संकेतों को जानने और इनसे जुड़े जोखिमों को समझने की आवश्यकता है।

विभिन्न एसटीडी के लक्षण निम्न हैं:

क्लैमाइडिया

क्लैमाइडिया एक बैक्टीरियल संक्रमण होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के साथ योनि, गुदा या मुख सेक्स करने से फैलता है। यह सबसे आम यौन संचारित संक्रमण है।

क्लैमाइडिया से ग्रसित बहुत से लोगों में कभी भी इसके लक्षण पैदा नहीं होते। अन्य लोगों में भी इसके फैलने के हफ्तों बाद लक्षण दिखते हैं।

पुरुषों में क्लैमाइडिया के सामान्य लक्षण निम्न हैं:

  • पेशाब करते समय दर्द होना
  • लिंग से असामान्य रिसाव निकलना
  • अंडकोषों में सूजन होना

मलाशय के माध्यम से क्लैमाइडिया फैलने पर कम आम लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह लक्षण निम्न हो सकते हैं:

  • मलाशय में दर्द
  • मलाशय से रिसाव निकलना
  • मल के साथ रक्त निकलना

गोनोरिया

गोनोरिया भी एक बैक्टीरियल संक्रमण होता है जो गुदा, गले या मूत्रमार्ग को प्रभावित कर सकता है।

यह संक्रमित व्यक्ति के साथ गुदा, मौखिक या योनि सेक्स के दौरान फैलता है।

गोनोरिया से पीड़ित अधिकतर लोगों में इसके कोई लक्षण पैदा नहीं होते। लेकिन जिनमें लक्षण पैदा होते हैं, वह निम्न हो सकते हैं:

  • पेशाब करते समय दर्द होना
  • लिंग से हरे, सफेद या पीले रंग का रिसाव निकलना

कम आम लक्षण निम्न हैं:

  • अंडकोषों में सूजन या दर्द होना
  • जोड़ों में दर्द होना
  • स्किन पर रैश या लाल चकत्ते होना
 
 
 
 

हेपेटाइटिस ए

हेपेटाइटिस ए एचएवी वायरस के कारण होने वाला हेपेटाइटिस का एक रूप है।

आमतौर पर हेपेटाइटिस ए के उपचार की आवश्यकता नहीं होती और यह अपने आप दूर हो जाता है, लेकिन यह अत्यधिक संक्रामक होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनिया भर में सालाना औसतन 14 लाख लोग हेपेटाइटिस ए का शिकार होते हैं।

यह भोजन, पीने के पानी, कच्ची शेलफिश और बिना कंडोम सेक्स के माध्यम से फैल सकता है।

हेपेटाइटिस ए के लक्षण निम्न हैं:

  • आँखें या स्किन पीली होना
  • भूख न लगना
  • पेट ख़राब होना या इसमें दर्द होना
  • बुखार
  • दस्त लगना
  • जोड़ों में दर्द
  • थकान महसूस होना

निम्न कारणों से हेपेटाइटिस ए फैलने की संभावना बढ़ जाती है:

  • दूषित भोजन खाना
  • दूषित कच्ची शेलफिश खाना
  • प्रदूषित पानी पीना
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध बनाते समय कंडोम या किसी अन्य बाधा विधि का उपयोग न करना
  • दूषित मल के संपर्क में आना

हेपेटाइटिस ए के उपचार में आमतौर पर लक्षणों को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, क्योंकि इसका कोई आधिकारिक उपचार उपलब्ध नहीं है।

हेपेटाइटिस बी

हेपेटाइटिस बी एचबीवी वायरस के कारण होने वाला हेपेटाइटिस का एक रूप है।

अन्य सामान्य यौन संचारित रोगों के विपरीत, जो जननांगों के आसपास अधिक स्पष्ट लक्षण पैदा करते हैं, हेपेटाइटिस बी लिवर में खतरनाक सूजन पैदा कर सकता है।

संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क में आने से आपमें हेपेटाइटिस बी फैल सकता है।

बहुत से लोग जिन्हें हेपेटाइटिस बी है, उनमें बिल्कुल भी लक्षण दिखाई नहीं देते। और जिनमें होते हैं, वो अक्सर इसे सर्दी या आम फ्लू के लक्षण समझ बैठते हैं।

कोई भी लक्षण न होने पर भी वायरस लिवर को नुकसान पहुँचाता रहता है।

यही कारण है कि प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से (साल में कम से कम एक बार) अपना फुल बॉडी चेकअप करवाते रहना चाहिए।

जब हेपेटाइटिस बी के लक्षण पैदा होते हैं, तो वह आमतौर पर निम्न होते हैं:

  • भूख न लगना
  • सुस्ती महसूस करना
  • हल्का बुखार आना
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • जी मचलना
  • उल्टी आना
  • पीलिया (स्किन का रंग पीला होना और मूत्र गहरे रंग का होना)

दाद (हरपीज)

हरपीज एक वायरल संक्रमण है, जो हरपीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) के कारण होता है।

यह दाद मुंह (मौखिक दाद या एचएसवी 1) या जननांगों (जननांग दाद या एचएसवी 2) को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण उँगलियों में छाले भी हो सकते हैं।

यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मुंह या जननांगों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैलता है, जिसमें संभोग, मुख मैथुन और चुंबन शामिल हैं।

आमतौर पर एचएसवी 1 मुँह में और एचएसवी 2 जननांगों में होता है, लेकिन दोनों में से कोई भी प्रकार किसी भी स्थान पर पाया जा सकता है।

हरपीज के लक्षणों को पहचानना मुश्किल हो सकता है। बहुत से लोगों में इसके बिल्कुल भी लक्षण नहीं होते। और जिनमें दाद विकसित होती हैं, उनको अक्सर अन्य स्किन स्थितियों जैसे कि मुँहासे, छाले या छोटे पानी के फफोले समझ लिया जाता है।

आमतौर पर वायरस के फैलने के 2 दिन से 2 हफ़्तों के भीतर लक्षण पैदा होते हैं। इसका प्रारंभिक प्रकोप काफी गंभीर हो सकता है।

पुरुषों में हरपीज के आम लक्षण निम्न हैं:

  • लिंग, अंडकोष, गुदा, नितंबों, या जांघों के आसपास दाद होना
  • होठों, जीभ, मसूड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों पर दाद होना
  • दाद वाले क्षेत्र में झुनझुनी, खुजली या जलन होना
  • पीठ के निचले हिस्से, नितंबों, जांघों या घुटनों की मांसपेशियों में दर्द होना
  • जननांगों की लसीका ग्रंथियों में सूजन होना
  • भूख न लगना
  • बुखार
  • बीमार होने जैसा अनुभव होना

ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी)

एचपीवी एक शब्द है, जिसका उपयोग वायरस के एक समूह को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, जिनके 150 से अधिक प्रारूप होते हैं।

चूँकि इनमें से अधिकांश प्रारूप हानिरहित होते हैं, लेकिन 40 को संभावित रूप से हानिकारक माना जाता है। इन 40 प्रारूपों को या तो कम-जोखिम या उच्च-जोखिम वाले प्रारूपों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

आजकल एचपीवी सबसे आम यौन संचारित रोगों में से एक है। अधिकांश लोग अपने जीवनकाल कभी न कभी इस वायरस से संक्रमित हो जाते हैं।

कम जोखिम वाले प्रारूपों के परिणामस्वरूप कुछ पुरुषों को जननांग मस्से हो सकते हैं, जबकि उच्च जोखिम वाले प्रारूपों से गुदा, गले और लिंग का कैंसर हो सकता है।

एचपीवी एक संक्रमित व्यक्ति की स्किन के संपर्क में आने से फैलता है, लेकिन यह आमतौर पर गुदा, मौखिक या योनि सेक्स के माध्यम से फैलता है।

लक्षण

आमतौर पर, एचपीवी से ग्रसित पुरुषों में कोई लक्षण नहीं होते हैं। लेकिन जिनको लक्षण होते हैं, वह निम्न हो सकते हैं:

  • जननांग मस्से (समतल व मांस के रंग के या छोटे धक्कों के समूह, जो फूलगोभी जैसे होते हैं)
  • मुंह या गले में मस्से (मौखिक सेक्स के माध्यम से फैलते हैं)

एचपीवी की रोकधाम

अन्य यौन संचारित रोगों के विपरीत, जिन्हें केवल कंडोम जैसी बाधा विधियों या सेक्स न करने से रोका जा सकता है, एचपीवी को अब टीकों से भी रोका जा सकता है।

अमेरिका के FDA संस्थान के अनुसार एचपीवी के दो सबसे सुरक्षित और कारगर टीके हैं: गार्डासिल (Gardasil) और सर्वारिक्स (Cervarix)

यह दोनों ही टीके एचपीवी टाइप 16 और 18 की रोकधाम में कारगर हैं, जो गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की सम्भावना को बढ़ाते हैं और अधीकांश मामलों (70 प्रतिशत) में इस कैंसर के मुख्य कारक होते हैं। यह एचपीवी टाइप 6 और 11 की भी रोकधाम करते हैं, जो 90 प्रतिशत मामलों में जननांग मस्सों का कारण बनते हैं।

गार्डासिल का एक नया संस्करण, जिसे गार्डासिल 9 कहा जाता है, वायरस के पांच अन्य प्रारूपों से भी बचाव करता है।

 
 
 
 

सिफलिस

सिफलिस एक बैक्टीरियल यौन संचारित रोग है जो गुदा, मौखिक और योनि सेक्स के माध्यम से फैलता है। यह एक प्राचीन रोग है जो आज भी काफी प्रचलित है और व्यापकता से बढ़ रहा है।

पुरुषों में सिफलिस को एक गंभीर यौन संचारित रोग माना जाता है, क्योंकि यह एचआईवी एड्स होने की सम्भावना को बढ़ा देता है।

सिफलिस के आम लक्षण

सिफलिस के चार चरण होते हैं:

  • मुख्य (प्राइमरी)
  • माध्यमिक (सेकेंडरी)
  • गुप्त (लेटेंट)
  • तृतीयक (टर्टियरी)

प्रत्येक चरण के लक्षणों का अपना सेट होता है। पुरुषों में प्राथमिक सिफलिस के निम्न लक्षण हो सकते हैं:

  • जहां से बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है, वहां पर एक बहुत छोटा, दृढ़ और दर्द रहित घाव होना। यह आमतौर पर लिंग, गुदा और मुख पर होता है और छोटा व दर्दरहित होने के कारण इसका पता लगाना मुश्किल होता है।
  • घाव के आसपास की लसिका ग्रंथियों में सूजन होना

माध्यमिक सिफलिस के लक्षण निम्न हो सकते हैं:

  • स्किन पर लाल चकत्ते होना, जिनमें खुजली नहीं होती। आमतौर पर यह शरीर के बाहरी हिस्से में होते हैं, जिनमें हथेलियाँ और पैरों के तलवे शामिल हैं।
  • थकान
  • गले में खराश
  • सिरदर्द
  • लसिका ग्रंथियों में सूजन

सिफलिस के कम सामान्य लक्षण

सिफलिस का गुप्त चरण तब आता है, जब माध्यमिक सिफलिस का इलाज नहीं करवाया जाता और इसके लक्षण अपनेआप दिखना बंद हो जाते हैं। सिफलिस का यह चरण बिना किसी लक्षण के सालों तक बना रह सकता है।

तृतीयक सिफलिस चौथा चरण होता है। यह चरण काफी दुर्लभ है, क्योंकि सिफलिस का इलाज न करवाने पर भी बहुत कम लोग चौथे चरण में प्रवेश करते हैं। यह काफी गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है, जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • दिल को नुकसान
  • तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचना, जिसमें दिमाग भी शामिल है
  • जोड़ों में नुकसान
  • शरीर के अन्य भागों को नुकसान

वायरस फैलने के कई वर्षों बाद भी सिफलिस का चौथा चरण होने पर, यह व्यक्ति की मृत्यु का कारण बन सकता है।

यौन संचारित रोगों और संक्रमणों की रोकथाम

बहुत से लोगों में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के यौन संचारित संक्रमण हो सकता है। इसका मतलब यह है कि यदि आप इससे बचना चाहते हैं, तो आपको सुरक्षित सेक्स का अभ्यास करना महत्वपूर्ण है।

एक यौन संचारित संक्रमण से पूरी तरह से बचने का एकमात्र तरीका है, किसी भी प्रकार के यौन संपर्क से परहेज करना है या संक्रमित व्यक्ति के खुले घावों और शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क में आने से बचना। लेकिन इसे रोकने के अन्य तरीके भी हैं।

संभोग के दौरान कंडोम और ओरल सेक्स के दौरान डेंटल डैम जैसी बाधाएं, सही तरीके से इस्तेमाल करने पर प्रभावी साबित होती हैं। कई साझेदारों के साथ सेक्स से परहेज करना और इसके बजाय सिर्फ एक पार्टनर के साथ यौन संबंध रखने से भी यौन संचारित संक्रमण को रोकने में मदद मिल सकती है।

कुछ यौन संचारित संक्रमण, जैसे एचपीवी और हेपेटाइटिस ए व बी के टीके उपलब्ध हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।

यदि आपमें यौन संचारित संक्रमण होने का अधिक जोखिम है (जैसे वेश्यावृत्ति या एक से अधिक यौन साझेदार होना), तो अपनी नियमित रूप से एचआईवी जाँच करवाना महत्वपूर्ण है। एचआईवी की प्रारंभिक पहचान हो जाने पर एंटीवायरल दवाओं के जरिये इसे नियंत्रित करना संभव होता है।

प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PrEP) के उपयोग से एचआईवी संचरण के जोखिम को कम किया जा सकता है। PrEP दवाओं का एक संयोजन है, जिनको संभावित संचरण के पहले लेने से एचआईवी फैलाने या प्राप्त करने के जोखिम को कम किया जा सकता है।

पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) एक दवा है, जिसे संभावित संचरण के बाद लिया जा सकता है। संभावित संचरण के बाद इसे 72 घंटे से पहले जल्द से जल्द लेने की जरूरत होती है।

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