शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के 5 आसान घरेलू उपाय

शुक्राणु का अपर्याप्त उत्पादन और खराब गुणवत्ता के कारण ही पुरुषों में नामर्दी और बाप न बनने की समस्या होती है। शुक्राणुओं की संख्या कम होने के कारण स्पर्म की एग के साथ फ़र्टिलाइज़ होने की सम्भावना कम हो जाती है जिसके फलस्वरूप गर्भधारण मुश्किल हो जाता है।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति के एक मिलीलीटर वीर्य में औसतन दो करोड़ शुक्राणु होते हैं। यदि व्यक्ति के एक मिलीलीटर वीर्य में डेढ़ करोड़ से कम शुक्राणु होते हैं तो उसे शुक्राणुओं की कमी (low sperm count) की समस्या होती है। इस समस्या को मेडिकल भाषा में oligozoospermia कहा जाता है।

डॉक्टर्स द्वारा किये गए शोधों के अनुसार गर्भधारण करने के लिए स्वस्थ पुरुष को स्खलन के दौरान कम से कम दो मिलीलीटर वीर्य (चार करोड़ शुक्राणु) महिला की योनी में निकालना जरूरी होता है। इससे कम मात्रा होने पर फर्टिलाइजेशन की सम्भावना काफी कम हो जाती है।

शुक्राणु कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सबसे मुख्य कारण निम्न हैं – असामान्य हॉर्मोन्स संतुलन, वीर्य में इन्फेक्शन, प्रोस्टेट ग्रंथि में इन्फेक्शन, वेरिकोसील बीमारी (एक बीमारी जिसमें अंडकोश की थैली की नसों में सुजन होने लगती है), शुक्राणु नलिकाओं का डैमेज होना, एनाबोलिक स्टेरॉयड्स का उपयोग, धूम्रपान, शराब का सेवन, ड्रग्स का सेवन, शरीर में जहरीले रसायनों का प्रवेश, हैवी मेटल और रेडिएशन के संपर्क में आना कुछ दवाओं के सेवन से भी शुक्राणुओं के उत्पादन में कमी आ सकती है। सेक्स के दौरान उपयोग किये जाने वाले लुब्रिकेंट्स भी शुक्राणुओं के लिए घातक हो सकते हैं।

हाल ही में हुए कुछ शोधों से यह बात सामने आई है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी (EMFs) के कारण अंडकोष में गर्मी उत्पन्न होती है जिसका शुक्राणुओं के उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए अपने पेंट में मोबाइल फ़ोन न रखें और न ही अपनी गोद में लैपटॉप रखके काम करें।

नीचे दिए गए तरीकों को अपनाकर आप अपने शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ा सकते हैं –

1. अपनी आदतों को बदलें

अपने अंडकोषों (वृषणों) को गर्म होने से बचाएं

आपने यह नोटिस किया होगा कि हमारे अंडकोष शरीर के बाहर की तरफ मौजूद होते हैं। इनके बाहर होने का सबसे मुख्य कारण यह है की इन्हें शरीर के अन्य अंगों के मुकाबले क्यादा ठंडक की जरूरत होती है। जब अंडकोष अधिक गर्म होने लगते हैं तो इनकी शुक्राणु बनाने की क्षमता काफी कम हो जाती है। इसलिए यदि आप अपने शुक्राणुओं के उत्पादन को बढ़ाना चाहते हैं तो अपने अंडकोषों को ठंडा रखें। इन्हें ठंडा रखने के लिए आप नीचे दिए गए उपाय अपना सकते हैं –

  • अत्यधिक टाइट पेंट या जीन्स न पहनें, क्योंकि इनसे अंडकोषों पर दबाब पड़ता है और उनमें गर्मी उत्पन्न होती है।
  • टाइट कच्छे (अंडरवियर) की जगह ढीले नाड़े वाले कच्छे पहनें।
  • रात को बिना अंडरवियर के सोयें ताकि आपके अंडकोष ठंडे रहें।
  • हॉट बाथ न लें।
  • अत्यधिक गर्म माहौल से बचें।
  • यदि आपको अधिक गर्म माहौल में काम करना पड़ता है तो शाम को घर आकर ठंडे पानी से नहायें।

स्पोर्ट्स खेलने से पहले एल-गार्ड (L-Guard) पहनें

स्पोर्ट्स खेलते समय अंडकोष में चोट लगने का खतरा रहता है। अंडकोष में क्षति पहुँचने पर शुक्राणुओं के उत्पादन पर काफी बुरा असर पड़ सकता है।

हर्बल आयल से अपने शरीर की नियमित मालिश करें

नियमित एक्सरसाइज करने के साथ-साथ शरीर की हर्बल आयल से मालिश करने से रक्त संचार ठीक रहता है और प्रत्येक अंग को पर्याप्त मात्रा में रक्त मिलता है। अंडकोष को पर्याप्त मात्रा में रक्त मिलने से उनकी उत्पादन क्षमता ठीक रहती है। साथ ही, तेल से लिंग की मालिश से भी जननांगों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

तनाव न लें

अत्यधिक तनाव लेने से शरीर के सेक्सुअल फंक्शन पर काफी बुरा असर पड़ता है, जिससे शुक्राणुओं के उत्पादन में भी कमी आ सकती है। अधिक काम करने से और अपने शरीर को उचित आराम न देने से भी तनाव बढ़ता है। इसलिए अपने आप को शांत रखने के रिलैक्सेशन तकनीकें अपनाएं। रोज नियमित रूप से योग और मैडिटेशन करके अपने मन और शरीर को स्वस्थ रखें। साथ ही, नियमित व्यायाम, रनिंग, स्विमिंग, साइकिलिंग करने से भी फायदा होता है।

  • हमारे शरीर में लेडिग (Leydig) नामक सेल्स होते हैं जो टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को विनियमित करते हैं। तनाव लेने से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जो लेडिग सेल्स को ब्लॉक करने लगता है। इसलिए जब भी हम तनाव लेते हैं तो हमारे शुक्राणुओं का उत्पादन होना बंद हो जाता है।
  • पूरी नींद लें, रात को जल्दी सोयें और सुबह जल्दी उठें और कम से कम 8 घंटे की नींद लें। कम नींद लेने से थकावट और तनाव बढ़ता है और शुक्राणु कम होते हैं।

धूम्रपान न करें

धूम्रपान करने से शुक्राणुओं की संख्या कम होती है और उनकी गति और क्वालिटी में कमी आती है। फर्टिलाइजेशन ठीक से होने के लिए शुक्राणुओं का अच्छी क्वालिटी का होना बहुत ही आवश्यक है। एक शोध के अनुसार धूम्रपान करने वाले पुरुषों में धूम्रपान न करने वाले पुरुषों के मुकाबले 22% कम शुक्राणु होते हैं। धूम्रपान में सिगरेट और गांजा ज्यादा नुकसान दायक होते हैं। इसलिए यदि आप अपने शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो धूम्रपान न करें।

शराब का सेवन कम करें

अत्यधिक शराब का सेवन करने से लिवर के कामकाजों पर बुरा असर पढ़ता है जिसके फलस्वरूप शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन काफी तेजी से बढ़ने लगता है। एस्ट्रोजन एक फीमेल हॉर्मोन होता है जो शरीर में महिला करैक्टर को बढ़ावा देता है। यह महिलाओं में ज्यादा मात्रा में पाया जाता है और पुरुषों में कम मात्रा में पाया जाता है। यदि पुरुषों में इस हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगे तो उनमें नामर्दी, लो स्पर्म काउंट और महिलाओं जैसी फीलिंग्स उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए यदि आप इस अवस्था से बचे रहना चाहते हैं तो शराब का कम से कम सेवन करें।

बार-बार और जल्दी-जल्दी वीर्यपात न करें

कम समय में बार-बार स्खलित होने से वीर्य की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ता है, वीर्य जल्दी गिरने की समस्या हो जाती है और उसमें शुक्राणुओं की मात्रा कम हो जाती है। चूंकि हमारा शरीर रोज लाखों शुक्राणुओं का उत्पादन कर सकता है, लेकिन यदि आपको पहले से ही कम शुक्राणु होने की समस्या है तो आप अपने दो बार के वीर्यपात के समय को बढ़ा दें। यदि आप रोज सेक्स या हस्तमैथुन करते हैं तो इसकी समय सीमा को और बढ़ाएं।

आस-पास के विषाक्त पदार्थों और केमिकल्स से सावधान रहें

आसपास के विषाक्त पदार्थों या केमिकल्स के संपर्क में आने पर शुक्राणुओं की साइज, गति और संख्या पर बुरा असर पड़ सकता है। चूँकि आसपास के केमिकल्स के संपर्क में आने से पूरी तरह बचना बहुत ही मुश्किल होता है, लेकिन आपके सम्पूर्ण स्वास्थ्य और शुक्राणुओं के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए इनसे बचना बहुत ही जरूरी है। इन पदार्थों के संपर्क में आने से बचने के लिए नीचे दिए गए उपाय करें –

  • यदि आप किसी केमिकल फैक्ट्री में काम करते हैं जहाँ पर आपको पूरे दिन विषाक्त केमिकल्स के आसपास रहना पड़ता है, तो अपनी स्किन को बचाने के लिए लंबी आस्तीन वाले कपड़े और दस्ताने पहनें। इसके अलावा, अपने चेहरे और आँखों को बचाने के लिए मास्क और चस्मा पहनें।
  • अपने घर में केमिकल प्रोडक्ट्स कीजगह जितने हो सके उतने नेचुरल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।
  • अपने गमले, गार्डन और घर में केमिकल कीटनाशकों और दवाओं का उपयोग न करें।

दवाओं का सेवन करने से पहले उनके प्रभावों की पूरी जानकारी ले लें

कुछ दवाओं के नियमित सेवन करने से शुक्राणु कम हो सकते हैं, यहाँ तक कि इनके ज्यादा सेवन करने से फर्टिलिटी पूरी तरह से ही ख़त्म हो सकती है। इसलिए यदि आप किसी दवा का नियमित सेवन करते हैं तो डॉक्टर से इसके प्रभावों की पूरी जानकारी ले लें। साथ ही, दवाओं के मामले में किसी भी प्रकार की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। आपको चाहे कितना छोटा रोग ही क्यों न हो, हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही दवाओं का सेवन करें।

2. अपने खानपान को ठीक करें और नियमित व्यायाम करें

नियमित व्यायाम और योग करें

आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में व्यायाम और योग करने के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल है। लेकिन, नियमित व्यायाम और योग करने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है, शीघ्रपतन ठीक होता है और शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में मदद मिलती हैं। साथ ही, यह आपको शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक मजबूत बनाते हैं। इसलिए रोजाना कम से कम एक घंटा व्यायाम और योग को दें। व्यायाम में आप रनिंग, वेट लिफ्टिंग, डम्बल एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग आदि कर सकते हैं। योग में आप प्राणायाम और अनुलोम-विलोम रोज करें। वैसे योग का हर आसन शरीर के लिए फायदेमंद होता है, इसलिए आप अपनी इच्छा अनुसार कोई भी आसन कर सकते हैं।

  • अत्यधिक हैवी एक्सरसाइज न करें, क्योंकि एक्सरसाइज करने से शरीर में एड्रेनल स्टेरॉयड हॉर्मोन्स रिलीज़ होते हैं जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करते हैं। इसलिए अत्यधिक हैवी लिफ्टिंग और थका देने वाली एक्सरसाइज से बचें।
  • एनाबोलिक स्टेरॉयड्स का उयोग न करें। यह आपके वजन को तो बढ़ा सकते हैं लेकिन इनके कारण आपके अंडकोष सिकुड़ सकते हैं और आपको इनफर्टिलिटी की समस्या भी हो सकती है। इसलिए यदि आप इनके सेवन के वारे में सोच रहे हैं तो अपना फैसला बदल लें।

हेल्थी फूड्स का सेवन करें

यदि आप अपने शुक्राणुओं के स्वास्थ्य को ठीक रखना चाहते हैं तो अपने भोजन में प्रोटीन, हरी सब्जियां और साबुत अनाज युक्त पदार्थों का सेवन करें। साथ अत्यधिक फैट और तेल युक्त पदार्थों से दूर रहें।

  • फिश, मीट, एग्स, हरी सब्जियाँ और फलों का खूब सेवन करें।
  • काजू, पिस्ता, बादाम, मूंगफली और कद्दू को भी शुक्राणु बढ़ाने में लाभकारी माना जाता है।
  • सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थ और अत्यधिक शुगर युक्त खाद्य पदाथों से परहेज करें। सोयाबीन युक्त खाद्य पदार्थों का शरीर पर एस्ट्रोजनिक इफ़ेक्ट होता है जो महिलाओं के लिए तो फायदेमंद हो सकता है लेकिन पुरुषों में शुक्राणुओं के उत्पादन में बाधा डाल सकता है। अत्यधिक शुगर युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में इन्सुलिन रेसिस्टेंस पैदा करते हैं, जिससे फर्टिलिटी कम होती है। एक शोध के अनुसार अत्यधिक शुगर का सेवन करने वाले पुरुषों में अन्य पुरुषों के मुकाबले 30% कम शुक्राणु होते हैं।

मोटापा को नियंत्रित करें

मोटापा कंट्रोल करने से भी शुक्राणु बढ़ते हैं। हालाँकि कि वैज्ञानिकों को नहीं पता कि मोटापा किस प्रकार से शुक्राणुओं की संख्या पर प्रभाव डालता है, लेकिन हाल ही में फ्रांस में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि मोटापा से ग्रसित पुरुषों में अन्य पुरुषों के मुकाबले शुक्राणु कम होने की सम्भावना 42% ज्यादा होती है। इसी शोध में यह बात भी सामने आई कि मोटापा से ग्रसित पुरुषों के वीर्य में बिल्कुल भी शुक्राणु न होने की सम्भावना 81% होती है।

  • मोटापा के कारण शुक्राणु कम होने की वजह का वर्णन करने के लिए कई वैज्ञानिकों के द्वारा अलग-अलग थ्योरीज सामने आई हैं। कुछ के मुताबित फैट टिश्यू टेस्टोस्टेरोन को एस्ट्रोजन में बदल देते हैं और कुछ के मुताबित जांघों में अत्यधिक फैट जमा होने के कारन अंडकोष काफी गर्म रहते हैं। वजह चाहे जो भी हो लेकिन यह बात तय है कि शरीर का मोटापा शुक्राणुओं पर बुरा प्रभाव डालता है, इसलिए अपने मोटापे को नियंत्रित करें।

मेडिसिन्स का सेवन करें

अपने शुक्राणु बढ़ाने के लिए आप मेडिसिन्स का सहारा भी ले सकते हैं। शोधों से यह पता चला है कि जो पुरुष लगातार 26 हफ़्तों तक रोजदिन में एक बार 5 मिग्रा फोलिक एसिड और 66 मिग्रा जिंक सल्फेट का सेवन करते हैं, उनके शुक्राणुओं की संख्या 75% तक ज्यादा बढ़ जाती है। शुक्राणुओं के निर्माण के दौरान डीएनए फार्मेशन की प्रक्रिया सबसे अहम होती है और इसमें फोलिक एसिड और जिंक सल्फेट काफी मदद करते हैं।

  • विटामिन सी और सेलेनियम युक्त मेडिसिन्स भी शुक्राणु बढ़ाने में फायदेमंद हो सकती हैं।

हर्ब्स और होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करें

शुक्राणु बढ़ाने के लिए आप होम्योपैथिक दवाओं का सेवन भी कर सकते हैं। इनमें निम्न घटक पाए जाते हैं –

  • पैसीफ्लोरा इन्कार्नैटा (Passiflora Incarnata): यह स्मोकिंग, गांजा और भांग के सेवन के कारण कम हुए शुक्राणुओं को बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही, यह पुरुषों की कामुकता को भी बढ़ाता है।
  • जिंकम मेटालिकम (Zincum Metallicum): यह पदार्थ शरीर में जिंक की मात्रा को बढ़ाता है जिससे वीर्य की क्वालिटी और शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है। जैसा कि हमने ऊपर मेडिसिन वाले सेक्शन में बताया था कि जिंक शुक्राणुओं के डीएनए फार्मेशन में काफी अहम भूमिका अदा करता है जिससे उनकी क्वालिटी अच्छी होती है।

ऊपर दिए गए घटक होम्योपैथिक दवाओं में काफी अहम होते हैं। इनके अलावा कई और हर्ब्स भी पाए जाते हैं जो शुक्राणु बढ़ाने में मदद करते हैं।

3. डॉक्टर से उपचार करवाएं

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन (STI) की जाँच करवाएं

सेक्स के दौरान ट्रान्सफर होने वाले कुछ इन्फेक्शन जैसे क्लैमिडिया (chlamydia) और गोनोरिया (gonorrhea) के कारण जनांगों में स्कार बन जाते हैं जो शुक्राणुओं के मार्ग में बाधा उत्पन्न करते हैं। इसलिए नियमित रूप से STIs की जाँच करवाते रहें और यदि आपको यह इन्फेक्शन है तो इसका उचित ट्रीटमेंट लें। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर आपको कुछ एंटीबायोटिक्स का सेवन करने को कहेंगे।

पता लगायें कि कहीं आपको वेरिकोसील (Varicocele) बीमारी तो नहीं

इस बीमारी के कारण अंडकोष की नालियां सूज जाती हैं और जिससे उनमें सड़न पैदा होने लगती है। इसके फलस्वरूप अंडकोष गर्म होने लगते हैं और शुक्राणुओं का उत्पादन कम हो जाता है। यदि आपको यह बीमारी है तो इसका उचित उपचार करवाएं। इसका उपचार करने के लिए डॉक्टर्स सर्जरी का सहारा लेते हैं।

हार्मोनल असंतुलन होने पर उसका उचित ट्रीटमेंट लें

हार्मोनल असंतुलन के कारण भी शुक्राणुओं के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए यदि आपको यह समस्या है तो डॉक्टर से इसकी उचित मेडिसिन्स और हॉर्मोन्स के इंजेक्शन लें।

  • आमतौर पर हॉर्मोन संतुलित करने का उपचार काफी लंबे समय तक चलता है और इसके उचित परिणाम दिखाई देने में लगभग दो-तीन महीने लग सकते हैं।

4. शुक्राणु बढ़ाने में मदद करने वाले खाद्य पदार्थ

माका रूट (Maca Root)

काली माका रूट शुक्राणुओं के उत्पादन और गतिशीलता को बढ़ाने में काफी मदद करती है। साथ ही, इसे कामुकता को बढ़ाने में और हॉर्मोन को संतुलित करने में काफी लाभकारी हर्ब माना जाता है।

रोज सुबह-शाम दो-दो चम्मच माका रूट के पाउडर का सेवन करें। इसे आप एक गिलास पानी, दूध या सूप में मिलाकर सेवन कर सकते हैं या फिर अपने भोजन की सब्जी में भी ऊपर से डाल सकते हैं।

नोट – चूँकि माका रूट में अत्यधिक मात्रा में फाइबर होता है, इसलिए इसके सेवन की शुरुआत आधा चम्मच से करें और धीरे-धीरे कुछ हफ़्तों के अन्तराल में मात्रा को बढ़ाते जाएँ।

अश्वगंधा

2013 में भारत के एविडेंस-बेस्ड कॉम्प्लीमेंट्री एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन में हुए एक शोध में यह पाया गया कि अश्वगंधा शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता बढ़ाने में अत्यधिक फायदेमंद होता है। इसी शोध में यह भी पाया गया कि अश्वगंधा वीर्य की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करता है। शोध के दौरान प्रतिभागियों को 90 दिनों के लिए रोज दिन में तीन बार 225 मिग्रा अश्वगंधा का डोज दिया गया था।

साथ ही, अश्वगंधा शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को भी ठीक रखता है। इसके अलावा, यह शरीर को शक्तिशाली भी बनाता है और तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।

  • रोज दिन में दो बार एक गिलास दूध में आधा चम्मच अश्वगंधा घोलकर सेवन करें।
  • या फिर, अश्वगंधा के सप्लीमेंट्स का सेवन करें। इसके उचित डोज जानने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

कोरियाई जिनसेंग

प्राचीन काल से ही कोरियाई जिनसेंग को तनाव कम करने में लाभकारी माना जाता है। यह टेस्टोस्टेरोन, शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता बढ़ाने में भी मददगार होता है। कुछ शोधों के अनुसार कोरियाई जिनसेंग सेक्स टाइम बढ़ाने में भी मदद करता है।

लगभग तीन महीनों के लिए रोज दिन में दो बार 500 मिग्रा कोरियाई जिनसेंग के कैप्सूल का सेवन करें।

लहसुन

लहसुन एक प्राकृतिक कामोद्दीपक होता है जो शुक्राणुओं के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें एलिसिन (allicin) नामक कंपाउंड होता है जो शुक्राणुओं की सहनशीलता को बढ़ाता है। साथ ही, लहसुन में सेलेनियम होता है जो शुक्राणुओं की गतिशीलता को ठीक करता है।

अपने रोज के भोजन में एक या दो लहसुन की कलियों को शामिल करें।

गोखरू

2012 में भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा किये गए एक शोध के अनुसार गोखरू शरीर में हॉर्मोन्स को संतुलित करके शुक्राणुओं की संख्या और क्वालिटी को बढ़ाने में मदद करता है।

डॉक्टर की सलाह लेकर रोज दिन में दो बार 500 मिग्रा गोखरू के कैप्सूल्स का सेवन करें।

डैमियाना (Damiana)

डैमियाना हर्ब भी लो स्पर्म काउंट से परेशान पुरुषों के लिए फायदेमंद होता है। यह तंत्रिकाओं को शांत करता है, चिंता से राहत प्रदान करता है, मांसपेशियों को आराम देता है और मानसिक थकावट को दूर करने में मदद करता है।

  • एक चौथाई चम्मच सूखी डैमियाना की पत्तियों को एक कप पानी में 5 से 10 मिनट के लिए उबालें। अब इसे छान लें और स्वादानुसार शहद डाल दें। कुछ महीनों के लिए इसे रोज दिन में तीन बार पियें।
  • या फिर, आप डॉक्टर से सलाह लेकर इसके सप्लीमेंट्स का सेवन भी कर सकते हैं।

सॉ पाल्मेटो (Saw Palmetto)

प्रोस्टेट ग्रंथि को स्वस्थ रखने के लिए सॉ पाल्मेटो का काफी इस्तेमाल किया जाता है। यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी काफी लाभकारी हर्ब होता है। यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नामर्दी) के इलाज में भी उपयोगी माना जाता है।

डॉक्टर से सलाह लेकर रोज दिन में दो बार 160 मिग्रा सॉ पाल्मेटो के सप्लीमेंट्स का सेवन करें। इसके सप्लीमेंट्स में 85 से 95% फैटी एसिड्स और स्टेरोल्स होना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

ग्रीन टी

शोधकर्ताओं के मुताबित ग्रीन टी में मौजूद अत्यधिक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं स्पर्म सेल्स को डैमेज करने वाले फ्री रेडिकल्स को ख़त्म करने फर्टिलिटी को बढ़ाते हैं।

2012 में मॉलिक्यूलर न्यूट्रीशन एंड फूड रिसर्च में पब्लिश हुई एक स्टडी के अनुसार ग्रीन टी में कुछ मात्रा में एपिगलोकेटेशिन गलेट (EGCG) नामक कंपाउंड होते हैं जो शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता को बढ़ाते हैं। इसीलिए ग्रीन टी को फर्टिलिटी बढ़ाने में लाभकारी माना जाता है। चूँकि EGCG की अधिक मात्रा होने पर इसका उल्टा प्रभाव पढ़ सकता है, इसलिए इसपर और शोध होना अभी बाकी है।

अपनी फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए रोज एक या दो कप ग्रीन टी का सेवन करें।

शुक्राणु बढ़ाने वाले अन्य उपाय

  • अपने भोजन और कॉस्मेटिक्स में आर्गेनिक प्रोडक्ट्स का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। विषाक्त केमिकल युक्त पदार्थों से दूर रहें।
  • विटामिन सी, जिंक, सेलेनियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स युक्त खाद्य पदार्थों जैसे कद्दू के बीज, अखरोट, तिल, अलसी, चिया बीज, पालक, अंडा, मसूर की दाल, फलियां, ब्रोकोली, टमाटर और संतरा का अधिक से अधिक सेवन करें। डॉक्टर से सलाह लेकर आप इन पोषक तत्वों सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।
  • प्लास्टिक की बोतलें, कंटेनर और अन्य प्लास्टिक से बनी वस्तुयों के उपयोग से बचें। इसके उपयोग से शरीर में एस्ट्रोजन बढ़ने की सम्भावना होती है।
  • टाइट कपड़े और अंडरवियर न पहनें।
  • हॉट बाथ या सौना (sauna) लेने से बचें क्योंकि इसके कारण अंडकोष गर्म हो सकते हैं।
  • तनाव न लें।
  • अपने वजन को कंट्रोल में रखें।
  • पर्याप्त नींद लें।

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