शुक्राणु को बनने में कितना समय लगता है?

आप हर दिन करोड़ों शुक्राणुओं का उत्पादन करते हैं, लेकिन हर एक शुक्राणु का शुक्राणुजनन चक्र लगभग 64 दिनों का होता है

शुक्राणुजनन चक्र शुक्राणु के पैदा होने से परिपक्व होने तक का पूरा चक्र होता है। यह आपके शरीर में लगातार शुक्राणुओं की आपूर्ति करता रहता है, जिससे आपके वीर्य में एक महिला को गर्भवती करने लायक शुक्राणु हमेशा मौजूद रहते हैं।

आपका शरीर कितनी बार शुक्राणुओं की आपूर्ति करता है, शुक्राणु उत्पादन को संभव बनाने के लिए आपके शरीर में क्या होता है, आप अपने शुक्राणुओं को स्वस्थ रखने के लिए क्या कर सकते हैं, आदि के बारे में अधिक जानने के लिए आगे पढ़ते रहें।

शुक्राणु उत्पादन की दर क्या है?

आपके अंडकोष शुक्राणुजनन के जरिये निरंतर नए शुक्राणु पैदा करते रहते हैं। हर एक शुक्राणु का शुक्राणुजनन लगभग 64 दिन का होता है

शुक्राणुजनन के दौरान, आपके अंडकोष प्रति दिन कई करोड़ शुक्राणु बनाते हैं – लगभग 1,500 प्रति सेकंड। एक पूर्ण शुक्राणु उत्पादन चक्र के अंत तक, आप 8 अरब शुक्राणु तक पुन: उत्पन्न कर सकते हैं।

यह संख्या अत्यधिक लग सकती है, लेकिन आप स्खलन के दौरान वीर्य की एक मिलीलीटर मात्रा में लगभग 2 से 30 करोड़ शुक्राणु कोशिकाओं को छोड़ देते हैं। गर्भधारण के लिए ताजा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, आपका शरीर हमेशा शुक्राणुओं की संख्या को जरुरत से अधिक बनाए रखता है।

शुक्राणु उत्पादन का चक्र क्या है?

शुक्राणु पुनर्जनन चक्र निम्न चरणों में होता हैं:

  1. द्विगुणित (दो क्रोमोजोम वाली) शुक्राणु कोशिकाओं का अगुणित (एक क्रोमोजोम वाली) शुक्राणु कोशिकाओं में विभाजन, जो जेनेटिक डाटा को धारण किये होते हैं।
  2. आपके अंडकोष, विशेष रूप से वीर्यजनक नलिकाओं में शुक्राणु कोशिकाओं का परिपक्व होना। हार्मोन भी इस प्रक्रिया में मदद करते हैं। एक परिपक्व शुक्राणु में एक सिर होता है जिसमें जेनेटिक डाटा होता है और एक पूंछ होती है जो शुक्राणु को फर्टिलाइजेशन के लिए महिला योनि में यात्रा करने में मदद करती है।
  3. एपिडीडिमिस में परिपक्व शुक्राणुओं का जाना। एपिडीडिमिस आपके अंडकोष से जुड़ी एक ट्यूब होती जो शुक्राणुओं को संग्रहीत करती है। एपिडीडिमिस स्खलन तक शुक्राणुओं को संरक्षित रखती है। यह वह जगह भी है जहाँ शुक्राणुओं को गतिशीलता, या स्थानांतरित करने की क्षमता प्राप्त होती है।
  4. स्खलन के दौरान इन शुक्राणुओं को वीर्य द्रव में छोड़ दिया जाता है

इस प्रक्रिया से मैं क्या फायदा ले सकता हूँ?

कुछ समय के लिए स्खलन न करने से (यानी ब्रह्मचर्य का पालन करने से) एपिडीडिमिस में शुक्राणुओं का भंडार बढ़ता जाता है और अगली बार जब आप स्खलन करते हैं तो आपके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या अधिक होती है। इससे फर्टिलाइजेशन की संभावना भी बढ़ जाती है।

इसलिए यदि आप और आपकी साथी गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे हैं, तो स्खलन के बीच कुछ दिन प्रतीक्षा करने से आपके गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।

आप अपनी साथी के ओव्यूलेशन से एक सप्ताह पहले स्खलन से परहेज करके, अपने अवसरों को और भी ज्यादा बढ़ा सकते हैं। ओव्यूलेशन उसे कहते हैं जब महिला अपने गर्भाशय में फर्टिलाइजेशन के लिए अंडा छोड़ती है।

ओव्यूलेशन महिला के मासिक धर्म चक्र के बीच के दिन होता है। यानी यदि महिला का मासिक धर्म चक्र 28 दिनों का है, तो वह 14वे दिन के आसपास ओव्यूलेशन करेगी। महिला का मासिक धर्म चक्र पीरियड्स शुरू होने के पहले दिन से शुरू होता है, और अगले पीरियड्स शुरू होने के एक दिन पहले ख़त्म होता है।

ओव्यूलेशन के दो दिन पहले और दो दिन बाद के दिन सबसे उर्वरक होते हैं, और इस दौरान महिला योनि में वीर्य स्खलन छोड़ने से उनके गर्भधारण की सम्भावना सबसे अधिक होती है।

वहीं दूसरी ओर, अधिक बार स्खलन करने से आपके हर एक स्खलन में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाएगी। तो दिन में कई बार स्खलन करके आप सेक्स के दौरान गर्भधारण की संभावनाओं को कम भी कर सकते हैं।

 
 
 
 

शुक्राणु स्वास्थ्य में सुधार कैसे करें?

आपके शुक्राणु जितने अधिक स्वस्थ होंगे, आपके उपजाऊ होने और महिला को गर्भवती करने की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी।

शुक्राणुओं की संख्या के अलावा, गर्भावस्था की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए निम्न चीजें भी आवश्यक हैं:

  • गतिशीलता: हर एक शुक्राणु को फर्टिलाइजेशन के लिए अंडे तक पहुँचने से पहले, महिला के गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब से यात्रा करने की आवश्यकता होती है। शुक्राणुओं की गतिशीलता को इस बात से मापा जाता है कि आपके कितने शुक्राणु इस यात्रा को करने के लिए सक्षम हैं। उपजाऊ होने के लिए आपके कुल शुक्राणुओं का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा गतिशील होना चाहिए।
  • शुक्राणु का आकार: एक सामान्य शुक्राणु की लंबी पूंछ और अंडाकार आकार का सिर होना चाहिए। आपमें सामान्य आकार के शुक्राणुओं की अधिक संख्या का मतलब है आपके साथी के साथ गर्भधारण करने की अधिक संभावना।

पर्याप्त मात्रा में शुक्राणु का उत्पादन करने के साथ-साथ, उनकी उच्च गतिशीलता और नियमित आकार सुनिक्षित करने के लिए आप निम्नलिखित चीजें कर सकते हैं:

1. नियमित रूप से व्यायाम करें

2014 के एक शोध में शोधकर्ताओं ने 231 प्रतिभागियों के 433 वीर्य नमूनों का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि जो पुरुष कार्डियो व्यायाम (दिल की धड़कन तेज करने वाले व्यायाम) करते थे या सप्ताह में कम से कम 3.2 घंटे वजन उठाते थे, उनमें व्यायाम न करने वाले पुरुषों के मुक़ाबले शुक्राणुओं की संख्या 42 प्रतिशत अधिक थी।

2. अपने आहार में पर्याप्त विटामिन सी और डी लें

2016 में 200 पुरुषों पर हुए एक शोध में पाया गया कि जिन पुरुषों ने अपना वजन कम किया और हर दूसरे दिन 1,000 मिलीग्राम विटामिन सी की खुराक ली, उनमें शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में वृद्धि देखी गई। यह प्रभाव अधिक ध्यान देने योग्य था क्योंकि पुरुषों का वजन कम हो गया था।

2015 में 102 जोड़ों पर हुए एक शोध में पाया गया कि जिन पुरुषों का विटामिन डी का स्तर सामान्य था उनकी महिला भागीदारों ने विटामिन डी की कमी वाले पुरुषों के भागीदारों की तुलना में उच्च गर्भावस्था दर का अनुभव किया, बावजूद इसके कि उनके शुक्राणुओं की संख्या या गतिशीलता में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं था।

3. पर्याप्त लाइकोपीन लें

2014 के एक शोध से पता चलता है कि रोजाना 4 से 8 मिलीग्राम लाइकोपीन का सेवन शुक्राणुओं की संख्या और जीवन क्षमता, या वीर्य के नमूने में रहने वाले शुक्राणुओं की मात्रा को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

लाइकोपीन एक एंटीऑक्सीडेंट है जो टमाटर, खुबानी, तरबूज, पपीता और अंगूर जैसे साइट्रस फलों और सब्जियों में पाया जाता है।

4. अपने धूम्रपान को सीमित करें

1982 के बाद हुए 33 शोधों की 2015 की एक समीक्षा में पाया गया कि धूम्रपान का वीर्य की गुणवत्ता और शुक्राणु के कार्य पर ध्यान देने योग्य प्रभाव पड़ता है, विशेष रूप से सामान्य स्वास्थ्य वाले पुरुषों में।

5. शराब का सेवन सीमित करें

2014 में 1,221 पुरुषों पर किए गए एक शोध में पाया गया कि कोई पुरुष जितना अधिक शराब पीता है, उतना ही अधिक वह अनियमित आकार के शुक्राणु पैदा करता है।

शोधकर्ताओं ने शराब पीने और कम टेस्टोस्टेरोन के बीच भी संबंध देखा, जो भी पुरुष प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

6. ढीले-ढाले अंडरवियर और कपड़े पहनें

आपके अंडकोष आपके शरीर से बाहर लटते होते हैं ताकि उनका तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तक बना रहे। यह तापमान आपके शरीर के तापमान से अधिक ठंडा होता है, और शुक्राणु उत्पादन के लिए जरूरी है।

तंग अंडरवियर, जींस, या पैंट पहनने से आपके अंडकोष आपके शरीर की तरफ धकेलते हैं और उनका तापमान बढ़ जाता है, जिससे बनने वाले शुक्राणु अपनी गतिशीलता और जीवन क्षमता खो सकते हैं।

अपने और अपनी साथी के गर्भधारण की संभावना कैसे बढ़ाएं

यदि आप और आपकी साथी गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप निम्न चीजें कर सकते हैं:

  1. स्वस्थ शुक्राणु छोड़ने की संभावना बढ़ाने के लिए सप्ताह में दो से तीन बार सेक्स करें
  2. सेक्स के सत्रों के बीच दो-तीन दिनों का अन्तराल रखें ताकि आपके वीर्य की मात्रा और शुक्राणुओं की गुणवत्ता उच्चतम स्तर पर हो। इन बीच के अंतराल के दिनों में किसी भी प्रकार का स्खलन जैसे हस्तमैथुन न करें।
  3. ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट का उपयोग करें। यह किट आपकी महिला साथी के मूत्र में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) के स्तर का परीक्षण करके ओव्यूलेशन होने वाला है या नहीं इसकी जानकारी देती है। एलएच का स्तर ओव्यूलेशन से ठीक पहले बढ़ जाता है। यदि इस किट में पॉजिटिव रिजल्ट आता है तो उस दिन सेक्स करें। अगले कुछ दिनों तक सेक्स करने से भी गर्भधारण की संभावना भी बढ़ सकती है।
  4. जब आप गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हों तो तेल आधारित लुब्रीकेंट का उपयोग न करें। शुक्राणु स्वास्थ्य पर तेल का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  5. यदि आप छह महीने से अधिक समय से गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं और नाकाम रहे हैं, तो वीर्य विश्लेषण के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। आपका वीर्य का स्वास्थ्य आपकी आयु, आहार और समग्र शुक्राणुओं की संख्या सहित कई कारकों पर निर्भर करता है। आपका डॉक्टर यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि आपके शुक्राणु कितने स्वस्थ हैं और क्या गर्भाधान संभव है, साथ ही आपको आगे क्या करना चाहिए इसकी भी सलाह दे सकता है।

निष्कर्ष

आपका शरीर हर दिन करोड़ों ताजा शुक्राणु पैदा करता है, और हर एक शुक्राणु को पूरी तरह परिपक्व होने में 64 दिनों का समय लगता है। इस कारण आपके शरीर में हर समय शुक्राणुओं की पर्याप्त आपूर्ति रहती है।

शुक्राणुओं की गुणवत्ता और मात्रा आपके आहार और जीवनशैली से प्रभावित होती है। अपने शुक्राणु को यथासंभव स्वस्थ रखने के लिए अच्छा खाएं, सक्रिय रहें और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली से बचें।