शुक्राणुओं की संख्या कितनी होनी चाहिए?

यदि आप बच्चे को जन्म देने के बारे में सोच रहे हैं तो शुक्राणुओं की संख्या महत्वपूर्ण हो सकती है। सामान्य से कम शुक्राणुओं की संख्या एक अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थिति का संकेत भी दे सकती है।

एक सामान्य शुक्राणुओं की संख्या प्रति मिलीलीटर (एमएल) वीर्य में 1.5 करोड़ शुक्राणु से लेकर 20 करोड़ शुक्राणु तक होती है। 1.5 करोड़ शुक्राणु प्रति मिलीलीटर या 3.9 करोड़ शुक्राणु प्रति स्खलन से कम संख्या को शुक्राणुओं की कमी माना जाता है।

आप वीर्य विश्लेषण के माध्यम से अपने शुक्राणुओं की संख्या का पता लगा सकते सकते हैं। अपने वीर्य विश्लेषण को डॉक्टर द्वारा या एक घर पर ही टेस्ट किट के माध्यम से कर सकते हैं। घर पर वीर्य विश्लेषण करने की कई किट बाजार में उपलब्ध हैं

अपने वीर्य विश्लेषण को समझना

वीर्य विश्लेषण निम्नलिखित का टेस्ट करता है:

  • शुक्राणु की संख्या (मात्रा)
  • शुक्राणु का आकार
  • शुक्राणु की गति, या “शुक्राणु गतिशीलता”

पुरुषों में बांझपन परीक्षण करने के लिए शुक्राणुओं की संख्या, आकार और गतिशीलता महत्वपूर्ण होती है। सटीक विश्लेषण प्राप्त करने के लिए आपका डॉक्टर अलग-अलग समय में शुक्राणु के तीन नमूनों लेकर परीक्षण करवाने की सलाह दे सकता है।

घर पर उपयोग की जाने वाली टेस्ट किट केवल शुक्राणुओं की संख्या के लिए परीक्षण करती हैं। यदि आप पूर्ण विश्लेषण में रुचि रखते हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें।

वीर्य विश्लेषण परिणाम तालिका

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित स्वस्थ या सामान्य वीर्य विश्लेषण परिणाम निम्नलिखित हैं। चूंकि सामान्य परिणाम एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए इन्हें एक सीमा के रूप में दिया गया है।

 डब्ल्यूएचओ मानक सीमा
स्खलन में कुल शुक्राणुओं की संख्या3.9-92.8 करोड़
स्खलन मात्रा1.5-7.6 मिलीलीटर
शुक्राणु एकाग्रता1.5-25.9 करोड़ प्रति मिलीलीटर
कुल गतिशीलता (प्रगतिशील और गैर-प्रगतिशील)40-81 प्रतिशत
प्रगतिशील गतिशीलता32-75 प्रतिशत
शुक्राणु आकृति4-48 प्रतिशत

शुक्राणुओं की संख्या क्यों मायने रखती है?

यदि आप प्राकृतिक रूप से बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपके शुक्राणुओं की संख्या स्वस्थ स्तर पर होना आवश्यक है

भले ही गर्भावस्था होने के लिए केवल एक शुक्राणु और अंडे की आवश्यकता होती है, लेकिन शुक्राणुओं को अंडे तक पहुँचने के लिए काफी लम्बा और कठिन रास्ता तय करना होता है, और इसलिए शुक्राणुओं की संख्या जितनी ज्यादा होगी, अंडे को निषेचित करने की सम्भावना भी उतनी ही ज्यादा होगी।

यहां तक कि अगर आप बच्चा पैदा करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, तब भी आपके शुक्राणुओं की संख्या समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

एक शोध में पाया गया कि कम शुक्राणुओं वाले पुरुषों के शरीर में मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर होने की संभावना अधिक थी। उन्होंने मेटाबॉलिक सिंड्रोम की उच्च आवृत्ति, या डायबिटीज, हृदय रोग और हार्ट अटैक के विकास की उच्च संभावना का भी अनुभव किया।

इन कारणों से, यदि आपमें शुक्राणुओं की संख्या कम पाई जाती है, तो डॉक्टर आपके टेस्टोस्टेरोन के स्तर, जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य का मूल्यांकन करना चाह सकता है।

 
 
 
 

शुक्राणुओं की संख्या प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करती है?

शुक्राणुओं की संख्या प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि आपके साथी के गर्भवती होने की संभावना शुक्राणुओं की कमी के साथ कम हो जाती है। शुक्राणु गुणवत्ता की समस्याएं भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

पुरुष बांझपन, जो कि अक्सर कम शुक्राणुओं की संख्या के कारण होता है, कई जोड़ों को गर्भधारण करने में परेशानी पैदा करने वाला एक सामान्य कारण है। लेकिन जोड़ों में होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में, महिला में कोई समस्या होने के कारण गर्भधारण नहीं होता।

लंबे समय तक गर्भधारण करने की कोशिश न करने पर भी गर्भधारण की सम्भावना कम होती है। अधिकतर मामलों में, महिला व पुरुष में कोई प्रजनन संबंधी समस्या न होने पर, गर्भधारण में छह महीने से एक साल तक का समय लग सकता है।

यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है, और आप व आपकी साथी छह महीने से गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको एक प्रजनन विशेषज्ञ के पास जाने की आवश्यकता हो सकती है।

या आप और आपके साथी की आयु 35 से कम है, और आप एक वर्ष से अधिक समय से गर्भधारण की कोशिश में नाकामयाब रहे हैं, तब भी आपको एक प्रजनन विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।

क्या शुक्राणुओं की कमी का कोई इलाज है?

पुरुष बांझपन या शुक्राणुओं में कमी के कई कारण हो सकती है, जैसे:

डॉक्टर आपका सही आंकलन करके, उचित उपचार की सलाह दे सकता है।

संभावित उपचार विकल्प निम्न हैं:

  • सर्जरी। यदि आपके अंडकोषों की नसों में सूजन या बाधा है, तो सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
  • एंटीबायोटिक्स। यदि कोई बैक्टीरियल संक्रमण आपके शुक्राणुओं की संख्या या प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स लिख सकता है।
  • थेरेपी या परामर्श। इनका उपयोग संभोग समस्याओं जैसे वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन या स्तंभन दोष के लिए किया जा सकता है।
  • हार्मोन थेरेपी। ऐसे मामलों जिनमें उच्च या निम्न हार्मोन के स्तर के कारण बांझपन हो रहा है, हार्मोन थेरेपी मदद कर सकती है।

शुक्राणुओं की संख्या में सुधार लाने वाले घरेलू उपचार

चूँकि शुक्राणुओं की कमी के कई मामलों में डॉक्टर के उपचार की आवश्यकता होती है, लेकिन खराब जीवनशैली भी इसका कारण बन सकती है। इस स्थिति में निम्नलिखित घरेलू उपाय शुक्राणुओं की संख्या में सुधार कर सकते हैं:

  • वजन कम करें। मोटापा या अधिक वजन होने से शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। इसलिए आहार और एक्सरसाइज के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखने का प्रयास करें।
  • विटामिन सप्लीमेंट लें। सबसे पहले किसी भी विटामिन की कमी की जांच के लिए अपने डॉक्टर से रक्त परीक्षण करवाएं। किसी भी विटामिन की कमी पाई जाने पर, डॉक्टर की सलाह के अनुसार विटामिन सप्लीमेंट लें
  • मादक द्रव्यों के सेवन से बचें, जिसमें भारी शराब पीना और नशीली दवाओं या तंबाकू का सेवन शामिल है।
  • ढीले, सूती से बने अंडरवियर पहनें।

निष्कर्ष

ऐसे कई कारक हैं जो आपके शुक्राणुओं की संख्या को प्रभावित कर सकते हैं, जिसमें जीवनशैली विकल्प या अंतर्निहित स्वस्थ्य समस्याएं शामिल हैं।

यदि आपमें शुक्राणुओं की कमी है, तो डॉक्टर इसके कारकों के आधार पर सही उपचार विकल्प प्रदान कर सकता है। यदि आपमें कोई मूत्र या प्रजनन संबंधी समस्या पाई जाती है तो डॉक्टर आपको मूत्र रोग विशेषज्ञ या प्रजनन विशेषज्ञ के पास भेज सकता है।

यदि आपमें शुक्राणुओं की कमी है और आप एक बच्चे को गर्भ धारण करने की उम्मीद कर रहे हैं, तो आज के समय में कई प्रजनन विकल्प उपलब्ध हैं, जैसे:

  • अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई)
  • इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ)
  • इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन के साथ आईवीएफ (आईसीएसआई)

इन विकल्पों के बारे में अधिक विस्तार से जानने के लिए प्रजनन विशेषज्ञ से बात करें। वह आपकी स्थिति की सही जाँच करके उचित विकल्प चुनने में मदद कर सकता है।

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