वीर्य पतला होने के कारण, फर्टिलिटी पर प्रभाव और इलाज

वीर्य पुरुषों में स्खलन के दौरान मूत्रमार्ग (लिंग) से निकलने वाला पदार्थ होता है। इसमें शुक्राणु होते हैं और प्रोस्टेट व अन्य रिप्रोडक्टिव अंगों से निकलने वाले फ्लुइड्स मौजूद होते हैं।

सामान्य रूप से, वीर्य गाड़ा सफ़ेद द्रव होता है। लेकिन कुछ कारणों से यह पतला और बिना रंग का हो सकता है।

वीर्य पतला होने के कारण, फर्टिलिटी पर प्रभाव और इलाज


वीर्य का पतला होना, शुक्राणुओं की कमी होने का संकेत हो सकता है जिससे पुरुषों में बच्चा पैदा न कर पाने की समस्या हो सकती है।

हालाँकि, यह समस्या बिना किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कुछ समय के लिए (टेम्पररी) भी हो सकती है।

वीर्य पतला होने के कारण​

वीर्य पतला होने के कई कारण हो सकते हैं। जिनमें से ज्यादातर का इलाज या रोकधाम संभव है।

1. शुक्राणुओं की कमी​

वीर्य पतला होने का सबसे बड़ा कारण शुक्राणुओं की कमी हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में अल्पशुक्राणुता (oligospermia) भी कहा जाता है।

एक मिलीलीटर वीर्य में 1.5 करोड़ शुक्राणु से कम होने पर शुक्राणुओं की कमी हो जाती है।

अल्पशुक्राणुता निम्न कारणों से हो सकती है –
  • वृषण-शिरापस्फीति (Varicocele) – इस समस्या में अंडकोषों की रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है। यह पुरुषों में फर्टिलिटी कम होने का सबसे मुख्य कारण होता है। लेकिन इसका उपचार संभव है।
  • संक्रमण (इन्फेक्शन) – प्रजनन अंगों में इन्फेक्शन होने पर भी उनमें सूजन आ सकती है जिससे शुक्राणुओं के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है।
  • ट्यूमर – अंडकोषों में किसी भी प्रकार का ट्यूमर होना।
  • हॉर्मोन असंतुलन – स्वस्थ शुक्राणुओं के उत्पादन के लिए अंडकोषों, पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस से निकलने वाले हॉर्मोन जरूरी होते हैं। इसलिए इनमें से किसी भी हॉर्मोन में असंतुलन होने पर शुक्राणुओं के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है।

शुक्राणु कम होने के अन्य संभावित कारण​

  • स्खलन की समस्याएं, जैसे प्रतिगामी स्खलन। प्रतिगामी स्खलन में वीर्य मूत्राशय में इकठ्ठा होने लगता है और पेशाब के साथ बाहर आने लगता है।
  • आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) में शुक्राणुओं के उत्पादन को रोकने वाली एंटीबॉडी होना।
  • अंडकोष या शुक्राणुओं को ट्रांसपोर्ट करने वाली नलिका में चोट लगना।

2. कम समय में बार-बार स्खलित होना​

कम समय में कई बार स्खलित होने पर भी वीर्य पतला हो सकता है।

यदि आप दिन में कई बार हस्तमैथुन करते हैं तो आपके वीर्य की क्वालिटी हर एक हस्तमैथुन के बाद कम हो सकती है

हमारे शरीर को नॉर्मल और हेल्थी वीर्य के उत्पादन के लिए कम से कम कुछ घंटों का समय तो लगता ही है।

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3. जिंक की कमी होना​

शरीर में जिंक की कमी होना भी वीर्य पतला होने का एक मुख्य कारण हो सकता है।

एक शोध से यह पता चला है कि जिन पुरुषों में जिंक की मात्रा पर्याप्त होती है या जो जिंक के सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं, उनमें एंटी-स्पर्म एंटीबॉडी के प्रभावों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

यह एंटीबॉडी हमारा इम्यून सिस्टम उत्पादित करता है, जो स्पर्म को गलती से फॉरेन बॉडी समझकर उनसे लड़ने लगती हैं।

वीर्य का रंग अलग होने का क्या मतलब है?​

यदि आपके वीर्य का रंग पानी जैसा है, तो यह किसी हेल्थ प्रॉब्लम का शुरुआती संकेत हो सकता है।

गुलाबी या भूरा लाल वीर्य होने का मतलब है कि आपके प्रोस्टेट में सूजन है या खून बह रहा है। वीर्य पुटिकाओं (seminal vesicles) में सूजन या रक्त बहने पर भी यह रंग हो सकता है। वीर्य पुटिकाएँ प्रोस्टेट के पीछे मौजूद दो ग्रंथियाँ होती हैं जो वीर्य में मौजूद ज्यादातर द्रव को उत्पादित करती हैं।

वीर्य पीला होने का मतलब है इसमें थोड़ी मात्रा में पेशाब का मौजूद होना या अत्यधिक वाइट ब्लड सेल्स (WBC) होना।

हरा वीर्य, जिसमें थोड़ा पीलापन भी हो, का मतलब है आपको प्रोस्टेट इन्फेक्शन हुआ है।

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डॉक्टर से मदद लें​

यदि आपका वीर्य हमेशा पतला या अलग रंग का निकलता है तो तुरंत किसी यूरोलॉजिस्ट से मिलें। यदि आपको बच्चा नहीं हो रहा है तो किसी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से भी मिलें।

डॉक्टर सबसे पहले आपके वीर्य का विश्लेषण (semen analysis) टेस्ट करवाएगा। यह टेस्ट स्पर्म और वीर्य के स्वास्थ्य को जानने के लिए किया जाता है।

साथ ही, इस टेस्ट से निम्न बातों की भी जाँच की जाएगी –
  • एक स्खलन में वीर्य की मात्रा
  • द्रवीकरण समय – वीर्य को गाड़ा सफ़ेद से पतला पानी जैसा बनने में लगने वाला समय
  • एसिडिटी (अम्लता)
  • शुक्राणुओं की संख्या
  • शुक्राणु गतिशीलता – शुक्राणुओं की गति करने की क्षमता
  • स्पर्म मोरफोलॉजि – शुक्राणुओं का आकार
डॉक्टर आपसे आपकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी पूछेगा और आपका भौतिक परिक्षण भी करेगा।

आपसे आपकी जीवनशैली के बारे में प्रश्न भी पूछे जायेंगे जैसे, क्या आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं।

यदि डॉक्टर को आपके हॉर्मोन संतुलन या जननांगों के स्वस्थ में गड़बड़ी लगती है तो वो इनका टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकता है।

पतले वीर्य को गाड़ा करने के उपचार​

शुक्राणु कम होने के कारण होने वाले पतले वीर्य में कोई उपचार करने की जरूरत नहीं होती। साथ ही, शुक्राणु कम होने का मतलब यह नहीं कि आप बाप नहीं बन सकते।

क्योंकि ज्यादातर मामलों में यह समस्या जननांगों में इन्फेक्शन के कारण होती है जो अस्थाई रूप से शुक्राणुओं को कम कर देती है। चूँकि यह इन्फेक्शन कुछ दिनों में अपनेआप ठीक हो जाता है, लेकिन फिर भी यदि आप चाहें तो इसके उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक दवाएँ ले सकते हैं।

यदि हॉर्मोन्स के असंतुलन के कारण शुक्राणु कम हुए हैं, तो आप हॉर्मोन ट्रीटमेंट ले सकते हैं।

यदि इसका कारण वृषण-शिरापस्फीति (Varicocele) है तो इसका उपचार सर्जरी के द्वारा हो सकता है।

इन सब उपचारों के अलावा आप अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर भी पतले वीर्य को गाड़ा करने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।

इसके लिए आप निम्न बातों का ध्यान रखें –
  • धूम्रपान करना छोड़ दें
  • यदि आपका वजन सामान्य से अधिक है तो उसे कम करें। इसके लिए आप एक्सरसाइज, योग, डाइटिंग और हेल्थी खानपान का सहारा ले सकते हैं।
  • शराब का सेवन कम करें।
  • पूरी नींद लें। रात को जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करें।
कुछ मामलों में पतला वीर्य होने का कारण कम समय में बार-बार स्खलित होना भी हो सकता है। इसलिए अत्यधिक हस्तमैथुन या सेक्स न करें।

निष्कर्ष​

ज्यादातर मामलों में वीर्य का पतला होना अस्थाई होता है और इसका उपचार किया जा सकता है।

यदि आपके वीर्य के पतलेपन का कारण शुक्राणुओं की कमी है और आप बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, तो इसके भी कई मेडिकल उपचार उलब्ध हैं। अधिक जानकारी के लिए किसी अच्छे फर्टिलिटी एक्सपर्ट से बात करें।

अंत में, किसी भी प्रमुख निर्णय को लेने से पहले अपने डॉक्टर से खुलकर बात करें और उसके द्वारा बताये गए सभी टेस्ट करवाएं।
 
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