हस्तमैथुन के दिमाग पर होने वाले अच्छे और बुरे प्रभाव

आपको हस्तमैथुन करना चाहिए या नहीं, यह पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है।

हस्तमैथुन के व्यक्ति पर कई अच्छे प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें सकारात्मक भावनाओं और संवेदनाओं को बढ़ावा देने वाले हार्मोन और रसायनों को बढ़ाना शामिल है।

हस्तमैथुन से जुड़े अधिकांश बुरे प्रभाव मानसिक होते हैं, और इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति हस्तमैथुन बारे में कैसा सोचता या अनुभव करता है।

हस्तमैथुन हमारे दिमाग को किस प्रकार से प्रभावित करता है, इस बारे में जानने के लिए आगे पढ़ते रहें। साथ ही, हम यह भी जानेंगे कि अत्यधिक हस्तमैथुन करने की आदत क्या है और इसे रोकने के लिए क्या करें।

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हस्तमैथुन की लत
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सारांश

दिमाग पर होने वाले अच्छे प्रभाव

हस्तमैथुन के आपके दिमाग पर कई संभावित स्वास्थ्य लाभ होते हैं, जो कि निम्न हैं:

हॉर्मोन और केमिकल स्त्राव

एक शोध से पता चलता है कि हस्तमैथुन, साथ ही अन्य यौन गतिविधियाँ जो यौन सुख या ऑर्गाज्म की ओर ले जाती हैं, वह दिमाग के आनंद पैदा करने वाले हिस्सों से हार्मोन और रसायनों के स्त्राव को उत्तेजित करती हैं। इनमें शामिल है:

डोपामाइन: “खुशी” हार्मोन के रूप में जाना जाने वाला यह हॉर्मोन एक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर होता है जो शरीर की प्रेरणा, गति और इनाम की प्रक्रियाओं में शामिल होता है।

ऑक्सीटोसिन: “लव” हार्मोन के रूप में प्रचलित ऑक्सीटोसिन के शरीर पर व्यावहारिक और शारीरिक प्रभावों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है, जैसे कि खुशी से जुड़े यौन, सामाजिक और मातृ व्यवहार को बढ़ावा देना। यह हार्मोन भलाई, सकारात्मक सामाजिक संपर्क, विकास और उपचार का समर्थन करने में भी मदद करता है।

सेरोटोनिन: सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो खुशी, आशावाद और संतुष्टि को बढ़ावा देता है

एंडोर्फिन: एंडोर्फिन को “फील-गुड” केमिकल के रूप में जाना जाता है, जो दर्द से राहत देने में मॉर्फिन जैसी दर्दनिवारक दवाओं से बेहतर काम करता है। यह नियमित व्यायाम करने से आपमें होने वाले सुखद और आत्मविश्वासी अनुभव के लिए भी जिम्मेदार होता है।

प्रोलैक्टिन: प्रोलैक्टिन एक हार्मोन है जो प्रजनन, तनाव प्रबंधन और यौन भावनाओं की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देता है

एंडोकैनाबिनोइड्स: यह न्यूरोट्रांसमीटर होते हैं जो व्यायाम, सामाजिक संपर्क और खाने जैसे व्यवहारों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह विभिन्न प्रतिक्रियाओं जैसे दर्द, सूजन, मेटाबोलिज्म, हृदय के कामकाज, सीखने व याद रखने की क्षमता, चिंता, डिप्रेशन और आदतों को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं

नॉरपेनेफ्रिन: यह एक उत्तेजक न्यूरोट्रांसमीटर है जो डोपामाइन संचरण को बढ़ाता और नियंत्रित करता है

एड्रिनैलिन: यह हृदय गति, रक्त वाहिका व वायुमार्ग व्यास, और मेटाबोलिज्म नियमित करने में मदद करके तनाव को कम करता है।

तो हस्तमैथुन के दौरान इन विभिन्न हार्मोनों के स्त्राव से, आपके दिमाग के लिए निम्न फायदे हो सकते हैं:

तनाव और चिंता में कमी

2020 के एक शोध के अनुसार, यौन गतिविधियों के दौरान निकलने वाला ऑक्सीटोसिन, शरीर में तनाव को बढ़ाने वाले हॉर्मोन, जैसे कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है, जबकि आराम व सुखद अनुभव को बढ़ावा देता है। प्रोलैक्टिन हॉर्मोन तनाव प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

नींद में सुधार

हस्तमैथुन तनाव व रक्तचाप को कम करने में मदद करने के लिए हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर जारी करता है और शरीर में आराम को बढ़ावा देता है, जिससे नींद आना आसान हो सकता है।

2019 में 778 वयस्कों पर हुए एक शोध में पाया गया कि यौन स्खलन और अच्छी नींद के बीच सीधा सम्बन्ध होता है। कई प्रतिभागियों ने महसूस किया कि हस्तमैथुन ने उनके सोने में लगने वाले समय को कम करने और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद की।

दर्द में कमी

एंडोर्फिन शरीर का प्राकृतिक दर्द निवारक होता है। यह शरीर में दर्द और इन्फ्लेमेशन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए भी जाना जाता है। यह प्राकृतिक दर्द निवारक महिलाओं में मासिक धर्म के दर्द को कम करने में भी मदद कर सकता है।

2013 के एक शोध में पाया गया कि यौन गतिविधि से माइग्रेन और कुछ सिर के एक तरफ होने वाले दर्दों से राहत मिलती है।

इम्युनिटी में सुधार

हस्तमैथुन प्रोलैक्टिन और एंडोकैनाबिनोइड्स के स्तर को बढ़ाता है, जो इम्युनिटी को नियमित करने में मदद करते हैं। यह तनाव को कम करने वाले हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर को भी बढ़ाता है।

मूड में सुधार

हस्तमैथुन सकारात्मक मूड से जुड़े हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकता है, जैसे डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन।

ध्यान और एकाग्रता में सुधार

सीखने, स्मृति और प्रेरणा में शामिल हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बढ़ाकर, हस्तमैथुन से ध्यान और एकाग्रता में सुधार हो सकता है।

2020 के एक शोध में पाया गया कि ध्यान और एकाग्रता में सुधार के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं, डोपामाइन के स्तर को बढ़ाकर और कठिन कार्यों को पूरा करने के लिए प्रेरणा बढ़ाने काम कर सकती हैं।

आत्मसम्मान में सुधार

हस्तमैथुन एड्रिनैलिन के स्तर को बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जिन पुरुषों की लार और मूत्र में एड्रिनैलिन का उच्च स्तर होता है, उनमें व्यक्तिगत विकास या जीवन के उद्देश्य की भावना भी अधिक होती है। इसलिए स्वयं को आनंदित करना सीखना भी आपको सशक्त बना सकता है और अपने शरीर की छवि में सुधार कर सकता है।

यौन क्रिया में सुधार

यौन प्रतिक्रिया चक्र में शामिल कई हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर, खुद के उच्च स्तर को भी बढ़ावा देकर यौन क्रिया में सुधार करते हैं। यानि सेक्स ही सेक्स की दवा होती है।

 
 
 
 

दिमाग पर होने वाले बुरे प्रभाव

हालाँकि अधिकांश लोगों को हस्तमैथुन से सकारात्मक प्रभावों का अनुभव होता है, लेकिन यह सभी के लिए सच नहीं है।

कुछ लोग नैतिक या धार्मिक विश्वासों के चलते हस्तमैथुन के प्रति नकारात्मक भावनाएं रख सकते हैं और इसे करने या इसके बारे में सोचने पर भी भी दोष या शर्मनाक महसूस कर सकते हैं।

अत्यधिक हस्तमैथुन करने से शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे कि स्किन छिलना, जननांगों में सूजन और ऐंठन होना।

कुछ लोगों के लिए हस्तमैथुन करना मुश्किल भी होता है, विशेष रूप से यौन रोग से ग्रसित या पहले कभी यौन दुर्व्यवहार झेल चुके लोग। इन लोगों को हस्तमैथुन में शामिल होना बहुत शर्मनाक या परेशान करने वाला लग सकता है।

हस्तमैथुन की लत

वर्तमान में, मनोवैज्ञानिक हस्तमैथुन या सेक्स की लत को मानसिक स्वास्थ्य समस्या नहीं मानते हैं। इसके बजाय, अधिकांश विशेषज्ञ अत्यधिक हस्तमैथुन को बाध्यकारी यौन व्यवहार (कंपल्सिव सेक्सुअल बिहेवियर) या नियंत्रण से बाहर यौन व्यवहार के रूप में वर्गीकृत करते हैं।

बाध्यकारी व्यवहार एक ऐसी क्रिया होती है, जिसमें व्यक्ति का शरीर एक ही काम को बार-बार दोहराता रहता है। यह कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि हमारे शरीर व दिमाग की आम प्रतिक्रिया करने की आदत होती है, जिसे खुद से नियंत्रित करना संभव है। अत्यधिक या नियंत्रण से बाहर बाध्यकारी व्यवहार होने की स्थिति में मनोवैज्ञानिक की सहायता ली जा सकती है।

अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ सेक्शुअलिटी एजुकेटर्स का कहना है कि हस्तमैथुन, सेक्स या पोर्न की लत को एक मानसिक बीमारी के रूप में वर्गीकृत करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

उपचार और रोकथाम

कुछ लोगों को कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के कारण बाध्यकारी यौन व्यवहार होने का खतरा अधिक होता है, जैसे:

  • अल्जाइमर रोग
  • बाइपोलर विकार
  • पिक रोग
  • क्लेन-लेविन सिंड्रोम
  • अनियंत्रित जुनूनी विकार (ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर)

इन स्थितियों वाले लोगों में, अंतर्निहित चिकित्सा समस्या का इलाज करने से अक्सर यौन मजबूरियों और व्यवहारों को कम करने में मदद मिलती है।

कुछ नशीले ड्रग और दवाएं, विशेष रूप से वह जो डोपामाइन के स्तर को बढ़ाती हैं, व्यक्ति की सेक्स इच्छा को भी बढ़ा सकती हैं। इनमें शामिल हैं:

  • मेथामफेटामाइन (methamphetamine)
  • पार्किंसंस की दवाएं
  • कोकीन

इन मामलों में, दवा या नशीली दवाओं के उपयोग को रोकने या बदलने से अक्सर अत्यधिक हस्तमैथुन जैसी यौन मजबूरियों को कम किया जा सकता है।

मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के कुछ रूप बाध्यकारी यौन व्यवहार को कम करने और उनके नकारात्मक प्रभावों को प्रबंधित करने में भी मदद कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • संज्ञानात्मक व्यवहारवादी रोगोपचार (cognitive behavioral therapy)
  • मनोगतिक चिकित्सा (psychodynamic therapy)
  • समूह चिकित्सा
  • युगल चिकित्सा

कुछ शोधों से यह भी पता चलता है कि कुछ दवाएं बाध्यकारी यौन व्यवहार को कम करने में मदद कर सकती हैं, जैसे:

  • सिटालोप्राम (citalopram)
  • नाल्ट्रेक्सोन (naltrexone)
  • सेलेक्टिव सेरोटोनिन रूप्टेक इनहिबिटर (selective serotonin reuptake inhibitors)

कुछ सुझाव और तकनीकें भी अत्यधिक हस्तमैथुन को कम करने या रोकने में मदद कर सकती हैं। इसमें शामिल हैं:

  • अश्लीलता और पोर्न से बचना
  • एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से मदद लेना
  • नियमित व्यायाम करना
  • सामाजिक संबंधों में सुधार करना
  • व्यस्त रहना
  • अपने हस्तमैथुन के उत्तेजकों को समझना, जैसे कुछ लोगों को अकेलेपन के कारण अत्यधिक हस्तमैथुन करने की आदत हो जाती है

डॉक्टर से कब मिलें

जब अत्यधिक हस्तमैथुन आपके दैनिक जीवन, मानसिक स्थिति या शारीरिक स्वास्थ्य में हस्तक्षेप करना शुरू कर देता है, तो मदद के लिए डॉक्टर या चिकित्सक से मिलें।

यदि आपको यौन सुख के प्रति शर्म, अपराधबोध, या अन्य नकारात्मक भावनाएं होती हैं, तब आपको एक मनोवैज्ञानिक से सहायता लेना चाहिए।

सारांश

हस्तमैथुन शरीर में ऐसे हॉर्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर के स्त्राव को उत्तेजित करता है, जो सकारात्मक भावनाओं, संवेदनाओं और शारीरिक प्रतिक्रियाओं से जुड़े होते हैं।

आमतौर पर हस्तमैथुन यौन सुख प्राप्त करने का एक स्वस्थ और जोखिम मुक्त तरीका होता है। यह आपको अपनी व्यक्तिगत पसंद या नापसंद के बारे में जानने में भी मदद कर सकता है। यह आपमें सुख, विश्राम, आत्म-सम्मान और शरीर की बेहतर छवि जैसी भावनाओं को भी बढ़ावा दे सकता है।

हालांकि, यदि हस्तमैथुन आपके दैनिक जीवन, रिश्तों, यौन क्रिया या शारीरिक स्वास्थ्य में हस्तक्षेप करता है, तो आपको डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से मिलना चाहिए।

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