सेक्स टाइम और स्टैमिना बढ़ाने में आयुर्वेद कैसे मदद कर सकता है?

मैं बिस्तर में लम्बे समय तक कैसे टिक सकता हूं? यह कई लोगों, खासकर युवाओं के बीच एक आम सवाल बन गया है।

हम सभी इस बात से तो सहमत होंगे कि पिछले कुछ वर्षों में हमारी जीवनशैली में भारी बदलाव आया है। सुख-सुविधाओं में वृद्धि होने के साथ-साथ, जीवन पहले से कहीं अधिक गतिहीन हो गया है।

इसके अलावा, खराब जीवनशैली की आदतें जैसे धूम्रपान, शराब, फास्ट फूड और दवाओं का बढ़ता उपयोग और उनके दुष्प्रभाव, खराब सेक्स लाइफ में काफी योगदान करते हैं।

इसके फलस्वरूप महिला और पुरुष दोनों की यौन समस्याओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इन समस्याओं में सबसे आम हैं – स्तंभन दोष, वीर्य जल्दी गिरना और पुरुषों व महिलाओं दोनों में सेक्स इच्छा में कमी आना

आजकल बाजार भी यौन समस्याओं को हल करने और संतुष्टि देने का दावा करने वाले उत्पादों से भर गया है। लेकिन इनमें से कितने वास्तविक होते हैं और यौन सहनशक्ति को बढ़ाते हैं, यह कोई नहीं जानता।

लेकिन हममें से अधिकांश लोग यह बात भूल जाते हैं कि हमारे अपने प्राचीन आयुर्वेद में यौन समस्याओं के सभी सवालों का समाधान है।

आयुर्वेद और यौन स्वास्थ्य

आयुर्वेद, जो एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है, यौन स्वास्थ्य और समस्याओं के इलाज के लिए पारंपरिक जड़ी-बूटियों, तेलों, व्यायामों और शारीरिक थेरेपी का उपयोग करती है।

हम में से अधिकांश लोग इस बात से अनजान हैं कि आयुर्वेद का दायरा काफी विशाल है जिसमें अधिकांश यौन समस्याओं के समाधान भी शामिल हैं। इन्हें हजारों वर्षों से उपयोग किया जाता आ रहा है, और यह कई बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज करते हुए और यौन इच्छा व ऊर्जा में सुधार करने में मदद करते हुए पाए गए हैं।

आयुर्वेद मुख्य रूप से हमारे शरीर के तीन घटकों वात, पित्त और कफ के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित है। जब खराब जीवनशैली और अधिक मात्रा में जंक फूड के सेवन के कारण वात घटक अधिक हो जाता है, तो यह अंततः नपुंसकता का कारण बन सकता है।

जब पित्त घटक अधिक होता है, तो शरीर की अत्यधिक गर्मी यौन ऊर्जा के आदर्श प्रवाह को रोकती है, और यदि कफ घटक अधिक होता है तो शारीरिक या किसी अंतरंगता संबंधी गतिविधि की यौन इच्छा कम होगी।

आयुर्वेदिक दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के जरिये इन तीन घटकों के बीच संतुलन वापस लाना संभव है।

शुक्र धातु

यौन जीवन से सम्बंधित सबसे महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक सिद्धातों में से एक शुक्र धातु है।

यह एक आयुर्वेदिक यौन शब्द है जो न केवल प्रजनन तरल पदार्थों (जैसे वीर्य, शुक्राणु और योनि का पानी) को दर्शाता है, बल्कि ओजस का भी प्रतिनिधित्व करता है, जो शरीर की हर कोशिका में मौजूद सबसे शक्तिशाली ऊर्जा है।

प्रजनन अंगों में मौजूद शुक्र में एक नया जीवन बनाने की शक्ति होती है, जबकि शरीर के बाकी हिस्सों में मौजूद शुक्र सुंदरता, यौन आकर्षण, आनंद और रचनात्मकता के लिए होता है।

यौन जीवन को बेहतर बनाने के लिए आयुर्वेद का सर्वोत्तम तरीका शुक्र को संरक्षित करने पर आधारित होता है, जो वात, पित्त व कफ के असंतुलन या उम्र बढ़ने के साथ स्वाभाविक रूप से घटता जाता है।

 
 
 
 

बेहतर सेक्स के लिए क्या करें और क्या न करें

सेक्स के लिए सही मौसम

आयुर्वेद की यौन स्वास्थ्य पुस्तक के अनुसार, सेक्स और आराम के लिए एक समय और मौसम होता है। जब सेक्स की बात आती है तो शरीर के प्राकृतिक लय को समझने से प्रजनन ऊतकों में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

इन लय से अनजान ज्यादातर लोग हर समय यौन गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। यह बांझपन, स्तंभन दोष, शीघ्रपतन, कठिन रजोनिवृत्ति आदि जैसी समस्याओं के बढ़ने का कारण हो सकता है।

आयुर्वेद यौन स्वास्थ्य गाइड में कहा गया है कि यौन क्रिया करने का सबसे अच्छा मौसम सर्दियों का होता है, क्योंकि यह वह समय होता है जब कफ गतिविधि अपने चरम पर होती है और स्वाभाविक रूप से शुक्र को बढ़ावा देती है।

वहीं दूसरी ओर, गर्मी और मानसून के मौसम कफ को कम कर देते हैं, जिसका अर्थ है कि इस दौरान सेक्स गतिविधि के लिए कम यौन ऊर्जा उपलब्ध होगी।

हम यह नहीं कह रहे कि इन मौसमों के दौरान आपको बिलकुल भी सेक्स नहीं करना है, बल्कि इन मौसमों के दौरान आवृत्ति को कम करना फायदेमंद हो सकता है।

सेक्स के लिए सही समय

आयुर्वेद यौन स्वास्थ्य गाइड में उल्लेख किया गया है कि संभोग करने का सबसे अच्छा समय शाम 6 से रात 10 बजे के बीच होता है क्योंकि इस दौरान कफ का स्तर चरम पर होता है।

दूसरा सबसे अच्छा समय सुबह 6 से 10 बजे का होता है। अन्य समय के दौरान सेक्स करना उपयुक्त नहीं होगा क्योंकि इन अवधियों के दौरान वात और पित्त अधिक होगा।

आयुर्वेद में मासिक धर्म के दौरान और सूर्य और चंद्र ग्रहण जैसे दिनों में संभोग से बचने के लिए भी कहा गया है।

खानपान और सेक्स

आयुर्वेद में यह भी सलाह दी जाती है कि भोजन के तुरंत बाद या व्रत के समय यौन क्रिया न करें। भोजन के 2-4 घंटे बाद सेक्स करना सबसे अच्छा होता है।

आयुर्वेद यौन स्वच्छता और अच्छी आदतों पर भी जोर देता है, जैसे कि मूत्र मार्ग संक्रमण से बचने के लिए यौन गतिविधि के तुरंत बाद पेशाब करना

संभोग के बाद नस्य करने और इसके बाद स्नान करने की भी सलाह दी जाती है। नस्य या नसी क्रिया में नाक में गाय के घी या बादाम के तेल की कुछ बूँदें डालना होता है।

संभोग के 30 मिनट बाद गुड़ के साथ गर्म दूध पीने से शरीर में शुक्र ऊर्जा को बनाए रखने में मदद मिलती है। अन्य शुक्र पूरक खाद्य पदार्थ हैं – दही, पनीर, घी, लस्सी, गन्ना व उसका रस, पके केले, आम, लीची, खजूर और चीकू फल।

शुक्र ऊर्जा की कमी को रोकने के लिए अत्यधिक खट्टे खाद्य पदार्थ जैसे इमली, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और कार्बोनेटेड पेय से बचना बेहतर होता है।

प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कैसे करें

आयुर्वेद में प्राकृतिक तरीके से गर्भवती होने के लिए भी कुछ सलाह दी गई हैं। इसमें गर्भधारण की योजना बनाने से पहले 2 महीने के लिए ब्रह्मचर्य का अभ्यास करना और सर्दी के कफ वर्चस्व वाले महीनों के दौरान कोशिश करना शामिल है।

पुरुषों को नियमित रूप से शरीर की मालिश करने और रोजाना व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। और महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे हर रात दूध में शतावरी पाउडर मिलाकर लें।

गर्भनिरोध

यहां तक कि आयुर्वेद की मदद से गर्भनिरोध का भी प्राकृतिक रूप से अभ्यास किया जा सकता है।

नीम के पत्तों को प्राकृतिक शुक्राणुनाशक के रूप में जाना जाता है और जब महिलाओं द्वारा अपनी उपजाऊ अवधि के दौरान इसका सेवन किया जाता है तो यह प्राकृतिक गर्भनिरोधक के रूप में कार्य कर सकते हैं।

यहां तक कि संभोग से 30 मिनट पहले महिला जननांगों पर नीम का तेल लगाने से भी शुक्राणु और अंडे के संलयन को रोका जा सकता है।

नीम का फल भी इसी तरह से मदद कर सकता है।

लम्बे समय तक सेक्स करने और स्टैमिना बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक दवाएं

1. अश्वगंधा

अश्वगंधा को भारतीय जिनसेंग भी कहा जाता है। आमतौर पर इसका उपयोग पुरुषों में स्तम्भन दोष और शीघ्रपतन के लिए के लिए और महिलाओं में यौन ऊर्जा में सुधार के लिए किया जाता है।

इसका मुख्य कार्य होता है तंत्रिका तंत्र में सुधार करना और तनाव को कम करना। यह प्रजनन अंगों की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को भी खोलता है और इस तरह यौन इच्छा के साथ-साथ लिंग के खड़ेपन में भी सुधार करता है।

2. शतावरी

यह आयुर्वेदिक दवा पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाकर यौन ऊर्जा में सुधार करती है। इसका उपयोग पुरुषों के लिए नपुंसकता और महिलाओं में कामेच्छा में सुधार के लिए भी किया जा सकता है।

3. गोखरू

यह दवा महिला और पुरुष दोनों के लिए कामोत्तेजक के रूप में काम करती है। यौन इच्छा को बढ़ाने के अलावा, यह पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में भी सुधार कर सकती है।

4. शिलाजीत

इस दवा को शुक्राणु स्वास्थ्य और संख्या में सुधार करने के साथ-साथ सेक्स से संबंधित हार्मोन को नियंत्रित करके सेक्स परफॉरमेंस में सुधार करने के लिए जाना जाता है। यह सेक्स स्टैमिना को बढ़ावा देने और यौन इच्छा में सुधार करने में मदद कर सकती है।

5. ताल मखाना

यह एक और अन्य आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग यौन इच्छा और यौन ऊर्जा में सुधार करने, शुक्राणु की गतिशीलता में सुधार करने और लिंग को कठोरता से खड़ा करने के लिए उपयोग किया जाता है।

बढ़ी हुई यौन ऊर्जा भी कामेच्छा के नुकसान को दूर करने में मदद करती है।

6. केसर

रोजाना खाने में केसर की आदत भी यौन इच्छा में सुधार और यौन ऊर्जा में वृद्धि कर सकती है।

7. नारियल का तेल

यह एक प्राकृतिक चिकनाई के रूप में कार्य कर सकता है और यौन क्रिया में इसे लुब्रीकेंट की तरह इस्तेमाल करने से यौन अनुभव में काफी ज्यादा सुधार हो सकता है। यह भी साबित हुआ है कि यह संभोग के दौरान यौन स्टैमिना, जोश और घर्षण को कम कर सकता है।

 
 
 
 

आयुर्वेद और यौन समस्याएं

शीघ्रपतन

यह एक आम समस्या है जिसमें पुरुष लिंग अंदर डालने के तुरंत बाद स्खलित हो जाता है। जिसका परिणाम होता है कम यौन संतुष्टि और खराब यौन जीवन। यह अंततः व्यक्ति में प्रजनन समस्याओं, तनाव, चिंता और डिप्रेशन पैदा कर सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, वात की अधिकता से शीघ्रपतन और अन्य यौन विकार हो सकते हैं।

आयुर्वेद किसी भी समस्या के सुधार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण आजमाता है। इसके अनुसार इस विशेष समस्या के उपचार के लिए कुछ जड़ी-बूटियों के संयोजन का सेवन, आयुर्वेदिक तेलों से मालिश, आहार में बदलाव और योग के अभ्यास का संयोजन अपनाना होगा।

प्राकृतिक कामोत्तेजक पदार्थ जैसे अश्वगंधा, गोखरू, सफेद मूसली और कौंच बीज पुरुषों में अच्छी सहनशक्ति और ताकत प्रदान करते हैं। इसके अलावा, यह जड़ी-बूटियां वात के स्तर को कम करने का भी काम करेंगी। आयुर्वेद में स्खलन में देरी करने वाली दवाएं भी हैं जिन्हें शुक्रस्तंभक कहा जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार लिंग के आसपास की मालिश के लिए सांडे के तेल का उपयोग बताया गया है, आमतौर पर संभोग से ठीक पहले। तेल स्किन के माध्यम से अवशोषित होता है और रक्त की आपूर्ति को बढ़ाता है।

योग आसनों का अभ्यास करने से भी शीघ्रपतन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। कुछ आसन जैसे पवनमुक्तासन, हलासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, प्राणायाम, बंध जैसे मूल बंध और महा बंध प्रजनन प्रणाली को मजबूत करते हैं और दिमाग को शांत करके जल्दी डिस्चार्ज होने की समस्या से निपटने में मदद करते हैं।

स्तंभन दोष

इस समस्या में व्यक्ति को लिंग खड़ा करने या खड़ा बनाये रखने में कठिनाई होती है। आज की तनाव भरी और गतिहीन जिंदगी के कारण पुरुषों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।

इसके प्रमुख कारण हैं डिप्रेशन, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और कमजोर तंत्रिका तंत्र। ये समस्याएं सेक्स लाइफ के कुछ अन्य मुद्दों को भी जन्म दे सकती हैं जैसे विवाहित जीवन में अराजकता, तनाव और कम आत्मसम्मान।

इस समस्या के इलाज में भी अश्वगंधा एक प्रमुख समाधान है। सोने से ठीक पहले एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर या पेस्ट को गर्म दूध में मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका अभ्यास कम से कम एक महीने तक नियमित रूप से करना होगा।

एक और अन्य आसानी से उपलब्ध समाधान है सहजन। सहजन एक प्राकृतिक कामोत्तेजक होता है और इसका नियमित सेवन करने से स्तंभन दोष से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। सहजन के पत्ते, फल और यहाँ तक कि फूलों की भी सब्जी बनाई जा सकती है।

एक और अद्भुत खाद्य पदार्थ है पालक। पालक में फोलेट नामक यौगिक होता है, और यह सिद्ध हो चुका है फोलेट रक्त संचार को बढ़ाता है। इसलिए फोलेट पुरुष यौन क्रिया में प्रमुख भूमिका निभाता है और इसकी कमी से स्तंभन दोष हो सकता है।

पालक को आप कई तरह से अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं, जैसे सूप, जूस, सब्जी, सलाद आदि।

बादाम में विटामिन ई और स्वस्थ वसा का भंडार होता है। यह तंत्रिका संबंधी कमजोरी से निपटने और रक्त संचार में सुधार करने के लिए जबरदस्त ऊर्जा प्रदान कर सकता है। रोजाना रात को सोने से पहले पिसे हुए बादाम को दूध में मिलाकर सेवन करें।

ऊपर बताये गए खाद्य पदार्थों के अलावा भी ढेर सारे ऐसे फल और सब्जियों का सेवन करना जरूरी है जो शरीर की विटामिन और मिनरल की जरूरत की आपूर्ति कर सकें।

इन खाद्य पदार्थों और योग आसनों को अपनी जीवनशैली में शामिल करने के साथ-साथ धूम्रपान, शराब, तंबाकू और यहां तक कि जंक फूड से भी बचना जरूरी है। इसके अलावा, शराब यौन ऊर्जा को रोकने का एक अत्यंत शक्तिशाली स्त्रोत है और इसके अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए।

निष्कर्ष

भले ही आयुर्वेद एक मजबूत परहेज आधारित स्वास्थ्य विज्ञान है, लेकिन इसमें सेक्स को बेहतर जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। यहाँ तक कि सेक्स के फायदों और बेहतर तरीके से करने का एक पूरा ग्रंथ तक मौजूद है, जिसे कामसूत्र कहा जाता है। यही कारण है कि भारत के कई महान ऋषि-मुनियों ने विवाहित जीवन जिया और उनके बच्चे भी थे।

आयुर्वेद में न केवल आधुनिक समय की सभी सेक्स संबंधी समस्याओं का समाधान है, बल्कि यह यौन स्वास्थ्य में सुधार करके व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य में भी सुधार करता है।

आयुर्वेद के अष्टांग हृदयम नामक ग्रंथ में यौन समस्याओं और उनके समाधान से जुड़ी हर चीज का विस्तृत विवरण है। इस ग्रंथ के अनुसार अनुशासित सेक्स गतिविधि से व्यक्ति अच्छी स्मृति, बुद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता है।

वहीं दूसरी ओर सेक्स का अत्यधिक वासना युक्त भोग करने से शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जैसे शक्ति की हानि, ऊतकों की कमी और इंद्रियों की कमजोरी।

अष्टांग हृदयम सेक्स भावना को बेहतर बनाने और मानसिक वासना को आध्यात्मिक कामुकता में बदलने के तरीके बताये गए हैं।